मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों तक समय पर आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने मसूर, उड़द जैसी कम जल आवश्यकता वाली फसलों के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रेरित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर घबराने की नहीं बल्कि पूर्व तैयारी और प्रभावी योजना की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनकी सुरक्षा व कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने आगामी दो वर्षों की कार्ययोजना के तहत “जलाभिषेक 2.0” अभियान को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। इसके तहत तालाबों, बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में” सिद्धांत के तहत भूजल पुनर्भरण के कार्यों को तेज करने पर जोर दिया गया।
बैठक में राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड विकसित करने और “जल गंगा संवर्धन अभियान” की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित सतत जल संरक्षण अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। सरकार का लक्ष्य है कि जल संरक्षण को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए।