कराची की विशाल रैली में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री इमरान खान को निकम्मा और मूर्ख करार दिया। उन पर जनता से धोखाधड़ी करने का सीधा आरोप मढ़ा। हमलावर विपक्ष का कहना था कि पाकिस्तान की मौजूदा इमरान सरकार तानाशाही का पर्याय बन गई है। पाकिस्तान के विपक्षी दलों के गठबंधन ने अपने देशव्यापी आंदोलन के तहत पीएम इमरान के खिलाफ कराची में रविवार को दूसरी रैली की।
विपक्षी पार्टियों ने 20 सितंबर को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) नाम से गठबंधन बनाया था। इस गठबंधन ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) सरकार को हटाने के लिए तीन चरणों वाला सरकार विरोधी आंदोलन शुरू किया है।
इसके तहत देश भर में सैकड़ों रैलियां, जनसभाएं और प्रदर्शन किए जाएंगे। अगले साल जनवरी में इस्लामाबाद मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस कड़ी में सबसे पहली रैली शुक्रवार को लाहौर के समीप गुजरांवाला में हुई थी।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने कराची के बाग-ए-जिन्ना में रविवार की रैली में कहा, ‘इस निकम्मे और मूर्ख प्रधानमंत्री को घर लौटना होगा।
इतिहास ने साबित किया है कि बड़ा से बड़ा तानाशाह भी कायम नहीं रह सकता तो यह कठपुतली पीएम कैसे टिका रहेगा?’ जरदारी ने प्रधानमंत्री खान पर निशाना साधते हुए आगे कहा, ‘यह नई लड़ाई नहीं है, लेकिन यह निर्णायक होगी।
रैली में कार्साज में हुए दोहरे धमाके की 13वीं वरसी भी मनाई गई। 2007 के इस धमाके में अपने घर लौट रहीं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को निशाना बनाया गया था। विस्फोट में 200 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।
रविवार की रैली में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) की उपाध्यक्ष मरयम नवाज और शाहिद खाकन अब्बासी, पख्तूनख्वा मिल्लि अवामी पार्टी के अध्यक्ष महमूद अचाकजई और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआइ-एफ) नेता मौलाना फजलुर रहमान ने भी हिस्सा लिया।