रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 42वें भारतीय तटरक्षक बल (ICG) कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल गया है और अब यह महीनों नहीं बल्कि घंटों और सेकंडों में तय होने लगा है। उन्होंने कहा कि उपग्रह, ड्रोन और आधुनिक सेंसरों ने पारंपरिक युद्ध रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आईसीजी को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक रणनीतियों और बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अब केवल कल्पना नहीं बल्कि वास्तविकता बन चुके हैं। कोई भी दुश्मन अब मिसाइलों के बजाय हैकिंग, साइबर अटैक और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के माध्यम से किसी देश की सुरक्षा व्यवस्था को पंगु बना सकता है। ऐसे में स्वचालित निगरानी नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम को शामिल करना जरूरी है ताकि प्रतिक्रिया समय सेकंडों में तय हो सके।
रक्षा मंत्री ने भारत के 7,500 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र और अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप जैसे द्वीपों की सुरक्षा को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि समुद्री खतरे अब बहुआयामी हो गए हैं, जिनमें जीपीएस स्पूफिंग, रिमोट-कंट्रोल नावें, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, ड्रोन और डार्क वेब नेटवर्क का उपयोग शामिल है। आतंकवादी संगठन भी अब डिजिटल मैपिंग और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने आईसीजी को सलाह दी कि वह अपनी रणनीति में AI, साइबर-डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म को शामिल करे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईसीजी अब तक 1,638 विदेशी जहाजों और 13,775 विदेशी मछुआरों को पकड़ चुका है और लगभग ₹37,833 करोड़ मूल्य के 6,430 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए हैं। बल ने अब तक 14,500 से अधिक लोगों की जान आपदा प्रबंधन अभियानों में बचाई है।