नई दिल्ली: पूरी तरह से कर्ज में डूबी सरकरी विमानन कंपनी एयर इंडिया को सरकार टाटा के हाथों जल्द से जल्द सौंपना चाहती है। दरअसल, इसे चलाने के लिए हर रोज सरकार को 20 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसलिए सरकार चाहती है कि जितना जल्द हो सके, इसे टाटा को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाए। गौरतलब है कि टाटा समूह की कंपनी टैलेस प्राइवेट लिमिटेड ने सबसे ज्यादा 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर एअर इंडिया की बिड जीती थी।
एयरलाइन के विनिवेश की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और टाटा समूह को इरादा पत्र पहले ही जारी कर दिया गया है। इससे पहले, सरकार के निजीकरण कार्यक्रम को चलाने वाले निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने बताया था कि इस समय एयर इंडिया को चलाने के लिए हर रोज 20 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस पर सरकार को अब तक मोटी रकम खर्च करनी पड़ी है। अब भी सरकार के हिस्से बड़ी बकायेदारी रहेगी। इसका भुगतान भी करदाताओं के पैसों से ही किया जाना है। इस साल 31 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक एअर इंडिया पर कुल करीब 61,562 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस कर्ज का करीब 75 फीसदी हिस्सा 46,262 करोड़ रुपये टाटा समूह को सौंपने से पहले ही एक स्पेशल परपज व्हीकल एआईएएचएल को सौंप दिया जाएगा, जो इसके भुगतान की व्यवस्था करेगी। यानी यह कर्ज भारत सरकार के खजाने से ही चुकाया जाएगा।
टाटा को एअर इंडिया की कई कीमती प्रॉपर्टी नहीं मिलेंगी, जैसे दिल्ली के वसंत विहार की हाउसिंग कॉलोनी, मुंबई के नरीमन पॉइंट की एअर इंडिया बिल्डिंग और दिल्ली की एअर इंडिया बिल्डिंग. इन सभी प्रॉपर्टी को बेचकर ही एआईएएचएल एअर इंडिया का कर्ज चुकाने की कोशिश करेगी।