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आम बजट: 2021-2022 के बजट में सरकार रोजगार के लिए उठा सकती हैं ये बड़ा कदम!

By: RNI Hindi Desk 
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आम बजट: 2021-2022 के बजट में सरकार रोजगार के लिए उठा सकती हैं ये बड़ा कदम!

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: साल 2021-2022 के लिए भारत सरकार एक फरवरी को देश का आम बजट पेश करेगी। इससे पहले विशेषज्ञ और अनुभवी लोग अपने-अपने तर्क और राय देना शुरु कर चुके हैं। कोरोना काल के बाद बाजारों की स्थिति और परिस्थिति दोनो ही बदल गई है। जिसमें सरकार को खासा ध्यान देना होगा कि आम नारगिकों की मांग, युवाओं के लिए रोजगार को देखते हुए बजट को पेश करना होगा। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार मांग, रोजगार और जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी के लिए आगामी बजट में लोगों के हाथ में अधिक नकदी देने की व्यवस्था ला सकती है।

आपको बता दें कि इस दिशा में वित्त मंत्रालय कई ऐसे वित्तीय उपायों को बजट में शामिल करने पर विचार कर रहा है जिससे आम लोग अधिक खर्च कर सकें। इसका सीधा सा मतलब यह है कि खर्च में बढ़ोतरी से ही वस्तुओं की मांग में बढ़ोतरी होगी। इससे मैन्यूफैक्चरिंग व सेवा क्षेत्र के कारोबार में इजाफा होगा और रोजगार का सृजन होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कई बार यह कहा है कि सही वक्त आने पर ऐसे प्रोत्साहन पैकेज दिए जाएंगे ताकि लोग अधिक खर्च कर सकें। सूत्रों के मुताबिक सरकार 80-सी की सीमा में बढ़ोतरी और भविष्य निधि यानि पीएफ की 12 फीसद की सीमा घटाने पर विचार कर सकती है। लेकिन पीएफ की सीमा में कटौती स्वैच्छिक रूप से लागू हो सकती हैं। लांग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स पर भी सरकार कुछ राहत देने के मूड में नजर आ सकती है।

कोरोना की महामारी से लड़ने के लिए सरकार वैक्सीन लगवाना शुरु कर चुकी है। जिससे यह साफ जाहिर है कि कुछ ही महीनों में कारोबार की गति और तेज होगी। सूत्रों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आगामी पेश होने वाले बजट में पीएफ कटौती की 12 फीसद की सीमा को घटाकर 10 फीसद तक लाने से वेतनभोगियों के हाथ में अधिक नकदी आएगी, जिससे आम लोग अधिक खर्च कर सकेंगे, और सरकार लांग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स पर भी कुछ राहत दे सकती है। मिली जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था अनिवार्य नहीं होगी  बल्कि विकल्प के तौर पर लागू हो सकती है। इससे नौकरीपेशा लोगों के हाथ में अधिक सैलरी भी आएगी और सरकार को भी पीएफ पर कम ब्याज देना होगा।

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