हिन्दू धर्म में फाल्गुन माह का बड़ा महत्व है, इस महीने में महाशिवरात्रि और होली जैसे 2 बड़े और मुख्य पर्व आते है और इसी बसंत के महीने में होली के पर्व की शुरुआत हो जाती है। फाल्गुन माह के कृष्ण पर्व की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई गयी और अब शुक्ल पक्ष की द्वितीया यानी 25 फरवरी मंगलवार को फुलैरा दूज मनाई जायेगी।
द्वितीया तिथि के बारे में मान्यता है कि यह तिथि बड़ी शुभ होती है, लेकिन फाल्गुन शुक्ल की द्वितीय की तो महिमा ही अलग है, दरअसल मान्यता है कि इस दिन खुद भगवान श्री कृष्ण फूलों की होली खेलते है और मथुरा वृन्दावन के हर मंदिर में इस दिन फूलों से होली खेली जाती है।

फुलैरा दूज पर भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की पूजा की जाती है और बड़े ही प्रेम भाव से उन्हें गुलाल समर्पित किया जाता है और उन्हें श्रृंगार की वस्तु भेंट की जाती है। माना जाता है कि इस दिन कोई महिला राधा रानी को सिंदूर अर्पित कर उसे अपने पास रख लेती है तो उसका पति किसी भी संकट में नहीं पड़ता है।

मथुरा वृन्दावन में मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और भगवान कृष्ण की मूर्ति को एक सजाए गए और रंगीन मंडप में रखा जाता है। रंगीन कपड़े का एक छोटा टुकड़ा भगवान कृष्ण की मूर्ति की कमर पर लगाया जाता है, जिसका प्रतीक है कि वह होली खेलने के लिए तैयार हैं।

अगर ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो इस दिन का बड़ा महत्त्व है क्यूंकि यह अबूझ मुहूर्त है, इस दिन आप बिना कोई शुभ घड़ी और चौघड़िया देखे खरीदी कर सकते है। वही जिन लोगों की कुंडली में कोई विवाह दोष है या वो मांगलिक है तो उनको इस दिन कृष्ण राधा की पूजा करनी चाहिए ताकि उनकी कुंडली का यह दोष खत्म हो सके।

इस दिन का इतना महत्त्व है कि सर्दी के मौसम के बाद इसे शादियों के सीजन का अंतिम दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियां होती हैं वही व्यापारी वर्ग भी नए कार्य और प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिये इस दिन को शुभ मानते है।