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किसान परेशान: सेब कारोबार पर कोरोना की मार, प्रति पेटी 1000 से 1200 रुपये दाम गिरे

सेब कारोबार पर कोरोना महामारी की जबरदस्त मार पड़ी है। दो लहरों के बाद अब कोरोना की तीसरी लहर की आशंका ने सेब उत्पादक किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। पंचकूला सेब मंडी में पड़ताल के दौरान ये बातें सामने आई हैं। पंचकूला की सेब मंडी से देश के लगभग सभी राज्यों में सेब सप्लाई होता है।

By Prity Singh 
Updated Date

ओलावृष्टि के कारण सेब के साइज और क्वालिटी पर असर पड़ा है। सरकार द्वारा एमएसपी से इनकार करने के कारण और तीसरी लहर की चिंता से किसानों ने जल्दबाजी में अपनी फसल की तुड़ाई करके उसको बाजार में उतार दिया। मार्केट में अधिक सप्लाई से सेब को अच्छे भाव नहीं मिल रहे है।

हिमाचल में इस बार चार करोड़ पेटी सेब का उत्पादन होने की संभावना है। पिछले 15 दिन में ही प्रति पेटी 1000 से 1200 रुपये तक थोक रेट कम हो गए हैं। पहले जो 25 से 30 किलोग्राम की पेटी 2700 रुपये की बिक रही थी, वह अब घटकर 1700 रुपये तक आ गई है। पंचकूला की सेब मंडी से देश के लगभग सभी राज्यों में सेब सप्लाई होता है।

पंचकूला में रोजाना 50 हजार पेटियां सप्लाई की क्षमता है। हिमाचल में हुई ओलावृष्टि और बागानों में कीटों के संक्रमण ने कोरोना काल में सेब व्यापारियों को पस्त कर दिया है। जिले की सेब मंडी में बागानों से केवल 50 फीसदी की सेब आ रहा है। इस सेब को भी ज्यादा खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। कोरोना के कारण देश विभिन्न हिस्सों से सजी रहने वाली सेब की मंडियों में अबकी बार सन्नाटा पसरा हुआ है।

असल में कोरोना का असर सेब के बागानों पर पड़ा है। मजदूर नहीं मिलने से सेब की तुड़ाई में देरी हो गई। इस कारण सेबों में भी कीटों का संक्रमण हो गया है। दोहरे संक्रमण के दौर से गुजरने के कारण भी सेबों के दामों में पिछले सीजन के मुकाबले तेजी है। सेब के बागानों का असर देश की सेब मंडियों में नजर आ रहा है। मंडियों में सेब कम आ रहा है, जो सेब आ रहा है उसके भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं।

ओलावृष्टि से सेब की किस्म अच्छी नहीं :

कोरोना के कारण आय कम होने के कारण अब हरियाणा समेत पंजाब, यूपी, दिल्ली और अन्य राज्यों से ऑर्डर भी कम मिल रहे हैं।। सरकार द्वारा एमएसपी से इनकार करने के कारण और तीसरी लहर की चिंता से किसानों ने जल्दबाजी में अपनी फसल की तुड़ाई करके उसको बाजार में उतार दिया। बाजार में एक साथ अधिक सेब आने से रेट नीचे आ गए।

हिमाचल में कोरोना नियमों की सख्ती का भी सेब कारोबार पर असर पड़ा है। जानकारी के अनुसार लॉकडाउन के कारण सेब बागान में सेब की तुड़ान करने वाले मजदूरों के चले जाने के कारण बागान मालिकों को स्थानीय स्तर पर ही सेब का तुड़ान करना पड़ा। इससे तुड़ान में देरी हो गई और सेब में कीड़ा लग गया। इस वजह से काफी सेब खराब हो गया। इसके साथ ही हिमाचल में हुई ओलावृष्टि ने भी फसल को खराब कर दिया।

पंचकूला से सेब मद्रास, कोलकाता, भोपाल, यूपी, नई दिल्ली, महाराष्ट्र जाता था। अबकी बार इन सिटी में जाने वाले सेब की खेप काफी कम हो चुकी है। अभी पंचकूला की मंडी में ज्यादातर सेब शिमला और आसपास का ही आ रहा है।

सरकार सेब पर टैक्स खत्म करे :-

सेब पर प्रदेश सरकार को दो प्रतिशत मार्केट फीस हटानी चाहिए। इसके लिए एसोसिएशन के सदस्य कृषि मंत्री जेपी दलाल से भी मिले थे। हिमाचल के किसान जब हिमाचल में टैक्स दे रहे हैं तो उनसे हरियाणा में 2 प्रतिशत टैक्स नहीं लेना चाहिए। कोरोना के चलते लोगों की आय कम होने से अन्य प्रदेशों से कम ऑर्डर आ रहे हैं, इससे आढ़ती समेत सभी के जीवन पर असर पड़ा है।

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