PM Modi Varanasi Visit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर एक भावनात्मक, मजबूत और रणनीतिक भाषण दिया, जो देश के किसानों, सुरक्षाबलों और आम जनता के दिल को छू गया। पीएम मोदी ने काशी में विराट किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 20वीं किस्त के रूप में करीब ₹21,000 करोड़ की राशि सीधे 10 करोड़ किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की। उन्होंने इसे काशी से किसानों को दिया गया “प्रसाद” बताया और कहा कि यह राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की नींव है। यह पैसा खरीफ सीजन के लिए बेहद सहायक साबित होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी विशेष उल्लेख किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब वे उस हमले के बाद काशी आए हैं, जिसमें 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की आतंकी हमले में जान गई थी। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय उन्होंने बाबा विश्वनाथ से पीड़ित परिवारों को संबल देने की प्रार्थना की थी और महादेव की कृपा से उन्होंने अपनी बेटियों के सिंदूर की रक्षा का वचन निभाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब आतंक के खिलाफ चुप नहीं बैठता, बल्कि दुश्मन को उसके घर में घुसकर जवाब देता है। यह नया भारत है, जो ताकतवर भी है और संवेदनशील भी।
विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई पर पाकिस्तान के साथ-साथ देश के कुछ राजनीतिक दलों को भी तकलीफ होती है। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को ‘तमाशा’ बताकर शहीदों का अपमान किया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब विपक्ष में बैठे कुछ नेता देश की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के विकास पर भी फोकस किया और बताया कि अब यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है, जो राज्य को रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बना रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यूपी में अब निवेश आ रहा है और अपराधी डर के साए में जी रहे हैं। यह परिवर्तन सुशासन और ईमानदार नेतृत्व का परिणाम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में देशवासियों से ‘स्वदेशी का संकल्प’ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन है जिसमें हर नागरिक की भूमिका जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाना राष्ट्र निर्माण का पहला कदम है। भारत को अपनी क्षमताओं, संसाधनों और लोगों पर विश्वास करना होगा, तभी देश वैश्विक अस्थिरता के बीच अपनी पहचान और ताकत बनाए रख पाएगा।