किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पारदर्शी एवं सुचारु रूप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत फार्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) को अनिवार्य कर दिया गया है। कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देश पर जिले में अभियान चलाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। शासन के प्रावधानों के अनुसार सभी भू-स्वामी किसानों के लिए फार्मर आईडी बनवाना आवश्यक है।
यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें भविष्य में कई महत्वपूर्ण शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है। बिना फार्मर आईडी के किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में परेशानी होगी और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
इसके अलावा समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी, फसल बीमा योजना, कृषि अनुदान, बीज एवं उर्वरक सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी प्रभावित होंगी।
प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा या ओलावृष्टि की स्थिति में मुआवजा प्राप्त करने में भी कठिनाई आ सकती है। साथ ही कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और अन्य बैंकिंग सेवाओं में बाधा उत्पन्न होगी तथा भविष्य में लागू होने वाली किसान हितैषी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल सकेगा।
किसान अपनी फार्मर आईडी बनवाने के लिए नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC), पंचायत कार्यालय, तहसील कार्यालय या अपने क्षेत्र के पटवारी से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, भूमि अभिलेख और मोबाइल नंबर जैसे आवश्यक दस्तावेज साथ ले जाना अनिवार्य है।
कलेक्टर मृणाल मीना ने जिले के सभी कृषकों से अपील की है कि वे शीघ्रातिशीघ्र अपनी फार्मर आईडी अनिवार्य रूप से बनवा लें, ताकि उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का समय पर लाभ मिल सके और आवश्यक कृषि सेवाओं का निर्बाध उपयोग हो सके। साथ ही उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को अभियान स्वरूप फार्मर आईडी निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए हैं। फार्मर आईडी किसानों के लिए आने वाले समय में सभी शासकीय योजनाओं और कृषि सुविधाओं की कुंजी बन गई है। समय रहते फार्मर आईडी बनवाकर किसान न केवल अपने अधिकार सुरक्षित कर सकते हैं, बल्कि सरकारी लाभों से भी वंचित होने से बच सकते हैं।