नई दिल्ली : महाकुंभ स्नान में होने में सिर्फ 11 दिन शेष है, उससे पहले ही कुंभ स्नान में शामिल दो अखाड़ों ने वापस जाने का एलान किया है। जिसमें पहला निरंजनी अखाड़ा है, तो वहीं दूसरा आनंद अखाड़ा है। आपको बता दें कि उत्तराखंड के हरिद्वार में 11 साल बाद कुंभ स्नान का आयोजन किया गया था, जिसकी शुरूआत कोरोना के साए में हुई थी। हालांकि इसे लेकर प्रशासन ने एहतियातन कई कदम उठाये, इसके बावजूद भी यहां कोरोना ने अपनी रफ्तार पकड़ ली।

कोरोना की इस भयावहता को ध्यान में रखते हुए निरंजनी अखाड़ ने कुंभ के समापन की घोषणा कर दी है। अखाड़ा ने कहा कि उनके कई साधु-संतों में कोरोना के लक्षण देखे गए हैं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी ने कहा कि, ‘कोरोना के कारण बिगड़ते हालात के मद्देनजर कुंभ मेला हमारे लिए खत्म हुआ। मुख्य शाही स्नान संपन्न हो गया है और अखाड़ों में कई लोगों में कोरोना के लक्षण दिखे हैं।’

महंत पुरी ने बताया कि कोरोना से बड़ी संख्या में साधु संतों से लेकर आम श्रद्धालु तक पीड़ित हैं। जिसके चलते अखाड़े ने फैसला लिया है कि महाकुंभ मेले को समय से पूर्व ही समाप्त कर दिया जाए। महंत रवींद्र पुरी ने दावा किया कि अन्य अखाड़े भी उनके अखाड़े की राय से सहमत हैं। महंत रवींद्र पुरी के मुताबिक 27 अप्रैल को महा कुंभ का शाही स्नान बचा है जो इस महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान होगा। लेकिन इसके लिए ज्यादातर संत इस बात पर सहमत हैं कि 27 अप्रैल को वह केवल सांकेतिक स्नान ही करेंगे। जिससे महाकुंभ स्नान की सनातन परंपरा जारी रहेगी।

अखाड़े ने बताया कि 17 अप्रैल को मेले का समापन कर सभी संत अपने अखाड़े में वापस चले जाएंगे। निरंजनी के अलावा आनंद अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी ने भी अपने अखाड़े की ओर से कुंभ समाप्ति की घोषणा कर दी है। वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी अखाड़ों की घोषणा का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह परिषद का निर्णय नहीं है। परिषद कुंभ में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों से नियमों का पालन करने की अपील करती है।
आपको बता दें कि कुंभ मेले को 14 दिन बीत गए हैं और इस दौरान 2500 से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, 1 से 31 मार्च तक कोरोना संक्रमण के हरिद्वार में औसतन 10 से 20 मामले आ रहे थे लेकिन 1 अप्रैल से इन मामलों का आंकड़ा प्रतिदिन 500 पार कर गया है। सैकड़ों साधु-संत भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं।

मेला आईजी सजंय गुंज्याल ने बताया कि अगर बॉर्डर्स की बात की जाए तो एसओपी के अनुसार पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता से चेकिंग अभियान चलाया। अगर बॉर्डर पर टेस्टिंग की बात की जाए तो 1 अप्रैल से लेकर 14 अप्रैल तक 1 लाख 54 हजार 466 टेस्ट किए गए थे, जिसमें से 222 लोग पॉजिटिव आए। साथ ही जो लोग टेस्टिंग नहीं करवाना चाह रहे थे और साथ ही आरटीपीसीआर कि रिपोर्ट भी नहीं लाए ऐसे 9 हजार 786 वाहन और 56 हजार 616 लोगों को वापस भेजा गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शम्भू झा से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि अप्रैल में कोरोना के मामलों में मार्च की तुलना में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 1 अप्रैल से लेकर 13 अप्रैल तक तकरीबन 2500 मामले आए हैं। मार्च में एवरेज 10 से 20 केस थे। निरंजनी अखाड़े के कुंभ समाप्ति के ऐलान के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कोरोना के मसले पर शुक्रवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई है। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में कुंभ मेला को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।