Home विदेश अमेरिका में नए राष्ट्रपति के लिए 3 नवंबर को होगा चुनाव, डोनाल्ड ट्रंप और बिडेन ने चुनाव प्रचार में लगाया जोर

अमेरिका में नए राष्ट्रपति के लिए 3 नवंबर को होगा चुनाव, डोनाल्ड ट्रंप और बिडेन ने चुनाव प्रचार में लगाया जोर

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अमेरिका के 50 राज्यों में से कुछ में ट्रंप आगे चल रहे हैं तो कुछ में बिडेन जोर लगाए हुए हैं। सर्वे रिपोर्ट भी कहीं ट्रंप को आगे बता रही है तो कहीं बिडेन को जीता हुआ बताया जा रहा है। इस बीच दोनों नेताओं के बीच गुरूवार को अंतिम बहस होनी है। दोनों इसके लिए तैयारी कर रहे हैं और अपनी बात को बेहतर तरीके से रखने की तैयारी कर रही है।

इसी सप्ताह गुरुवार को दोनों नेताओं की टीवी पर अंतिम बहस होगी। नए नियमों के तहत शुरुआती दो मिनट तक एक नेता के बोलने के दौरान दूसरे नेता का माइक ऑफ रहेगा। पिछली बहस में दोनों नेताओं ने एक दूसरे को काफी कुछ बुरा भला कहा था और अमेरिकी चुनाव के इतिहास में इसे स्तर गिराने वाला कहा गया।

इसके बाद ही बहस आयोग ने नए नियमों का एलान किया। ओपन डिस्कसन के दौरान माइक का म्यूट बटन तो नहीं चलेगा लेकिन दूसरे के बोलने में बाधा डालने वाले नेता का समय काटा जाएगा। पिछली बहस में डोनाल्ड ट्रंप ने जो बिडेन के बोलने के दौरान कई बार बाधा डाली थी।

वैसे तो अक्टूबर माह में दोनों नेताओं के बीच दो बहस होनी थी मगर डोनाल्ड ट्रंप को कोरोना हो जाने की वजह से एक बहस कैंसिल कर दी गई थी। अब अंतिम बहस होने जा रही है। दरअसल इससे पहले हुई बहस में दोनों नेताओं ने एक दूसरे को बोलने के दौरान ही अड़ंगा डाला था। वो बीच-बीच में टोकाटोकी कर रहे थे।

इस बहस के बाद ही ट्रंप की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई जिसकी वजह से बहस कैंसिल हो गई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाने पर ट्रंप को तीन दिन तक अस्पताल में बिताना पड़ा था, उसके बाद वो सामान्य हो पाए।

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया के दौरान जो दो सबसे प्रमुख कैंडिडेट उभरकर आते हैं, उन दोनों के बीच कई मुद्दों पर एक विचार विमर्श और बहस होती है। जिससे देश और दुनिया संबंधी नीतियों को लेकर दोनों के नजरिये को समझने में मदद मिलती है। पिछले कुछ समय से यह डिबेट डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के कैंडिडेट्स के बीच ही होती आ रही है।

वोटरों के लिए उपयोगी हैं डिबेट 

विश्लेषकों का एक वर्ग इन डिबेट्स को वोटरों के लिए काफी जरूरी प्रक्रिया मानता है। इनके अलावा, Pew रिसर्च सेंटर लगातार इनकी उपयोगिता और असर को लेकर रिसर्च करता रहा है। रिसर्च में पाया गया है कि करीब दो तिहाई वोटर मानते रहे हैं कि किस उम्मीदवार को वोट दिया जाए, यह तय करने के लिए ये डिबेट या तो काफी या फिर किसी न किसी तरह से उपयोगी रहे हैं। कई बार वोटर इन डिबेट्स के माध्यम से ही अपना वोट तय कर लेते हैं।

इन डिबेट्स की अहमियत को लेकर पॉलिटिकल पंडितों और विश्लेषकों का अलग-अलग मानना है। एक वर्ग मानता है कि आधुनिक समय में ये डिबेट नीति और सिद्धांतों पर सार्थक बहस करने के बजाय मीडिया को हथियार बनाकर सिर्फ मत और मतभेद बताने का मंच रह गए हैं। वोटर जो कुछ रैलियों और चुनाव प्रचारों में सुन पाते हैं, वही इन डिबेट्स में भी दोहराया जाता है। यह वर्ग इन डिबेट्स की उपयोगिता पर सवाल खड़े करता है।

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