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किसानों के विरोध के बीच दुष्यंत चौटाला ने की पीएम मोदी से मुलाकात

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केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान ट्रैक्टर मार्च निकालने की तैयारी में हैं।

दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों का असर अब हरियाणा की राजनीति में देखने को मिला है, चहलकदमी का दौर तेज हो चला है। तमाम तरह की कयासों के बीच दुष्यंत चौटाला ने आज पीएम मोदी से मुलाकात की।

करीब एक घंटे चली मुलाकात के बाद चौटाला बिना मीडिया से संवाद किए चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए। अनुमान जताया जा रहा है कि इस बैठक में वह कृषि कानून और किसानों को लेकर चर्चा हुई।

इसके अलावा वह टेक्सटाइल हब, एयरपोर्ट, ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर, रेल मार्गों पर भी बात की। इसे पहले सीएम मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला, गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर चुके हैं।

चौटाला हरियाणा में भाजपा नीत सरकार में गठबंधन साझेदार जननायक जनता पार्टी के नेता हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जजपा के कुछ विधायक प्रदर्शनकारी किसानों के दबाव में हैं।

बता दें कि सोमवार को इनेलो प्रमुख अभय चौटाला ने एक चिट्ठी लिखकर खट्टर सरकार का विरोध किया था और कहा था कि अगर 26 जनवरी तक किसानों की बात नहीं मानी जाती है तो उनकी इस चिट्ठी को ही इस्तीफा माना जाए।

उसके बाद से ही हरियाणा में सियासी चहलकदमी तेज देखी जा रही है। अभय चौटाला ने अपने पत्र में कहा था कि वो ऐसी संवेदनहीन विधानसभा में नहीं रहना चाहते है। आप को बता दे कि किसानों का आंदोलन बुधवार को 49वें दिन जारी है।

आंदोलनकारी किसान लोहड़ी पर्व पर आज नये कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताएंगे। किसान संगठनों के नेताओं ने आंदोलन तेज करने को लेकर पूर्व घोषित सभी कार्यक्रमों को जारी रखने का फैसला लिया है।

बता दें कि, पिछले डेढ़ महीने से जारी आंदोलन में अब तक 60 से ज़्यादा किसान अपनी जान दे चुके हैं। पंजाब, हरियाणा और देश के कुछ अन्य हिस्सों से आए हजारों किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद एक महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को केंद्र सरकार द्वारा पास किए गए तीनों नए कृषि कानूनों के लागू किए जाने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन का हल निकालने के लिए एक समिति का भी गठन किया है। इस कमेटी में कुल चार लोग शामिल हैं।

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