कड़ाके की ठंड से जहां जनमानस ठिठुड़ रहा है, वहीं किसानों की फसल भी ठंड की मार से अछूती नजर नहीं आ रही है। ठंड से पढ़ने वाला पाला मौसमी फसल का नुकसान कर रहा है। जिससे किसानों को चिंता सताने लगी है, ऐसे में किसान फसल बर्बाद होने का जिम्मा किसको दें।
अत्यधिक पाला फसलों के लिए हानिकारक होता है। इन दिनों कड़ाके की ठंड व लगातार पाला गिरने से काश्तकार फसल सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित है। इन दिनों गेहूं, सरसों, आलू, गन्ना व प्याज की फसल तैयार हो रही है। आलम यह है कि जिस गोभी की फसल को 1 महीने पहले लगाया गया था , पाले के कारण वह आज खराब हो चुकी है। किसानों का कहना है कि इस समय गोभी की फसल तैयार हो चुकी होती थी और बाजार में इसकी बिक्री हो रही होती।
वही खेती कर जीवन यापन कर रहे किसानों का कहना है, कि पाले की मार के कारण उनकी कई बीघा फसल खराब हो चुकी है। जिसके बाद से उनके सामने आर्थिक मंदी का संकट मंडराने लगा है। पाले की मार ने गेहूं, सरसों, आलू व प्याज की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। पाले से कई जगह गेहूं के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर बारिश हो जाए तो बची हुई फसल को बर्बाद होने से रोका जा सकता है।
(अमित सिंह कंडियाल की रिपोर्ट)