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अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर मंथन, डॉ. मोहन यादव बोले- अब ‘दाल नहीं गली’ नहीं, घर-घर दाल गलेगी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दालें शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं और भारतीय संस्कृति में इन्हें “परमात्मा का प्रसाद” माना गया है।

By: Abhinav Tiwari 
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अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर मंथन, डॉ. मोहन यादव बोले- अब ‘दाल नहीं गली’ नहीं, घर-घर दाल गलेगी

मध्यप्रदेश के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत राष्ट्र-स्तरीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि शिवराज सिंह चौहान की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन का उद्देश्य देश को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना रहा।

दलहन आत्मनिर्भरता: शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का आधार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दालें शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं और भारतीय संस्कृति में इन्हें “परमात्मा का प्रसाद” माना गया है। उन्होंने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश को चुने जाने पर आभार जताया और कहा कि इस अभियान से वर्षों पुराना मुहावरा ‘दाल नहीं गली’ अब बदल जाएगा और घर-घर दाल गलेगी।

सिंचाई विस्तार से बदली कृषि की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2003 तक मध्यप्रदेश में केवल 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित था, जो बीते 20 वर्षों में बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि आने वाले समय में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा, ताकि प्रदेश के हर गांव और हर खेत तक पानी पहुंच सके।

नदी जोड़ो परियोजनाएं: किसानों के भविष्य की नींव

डॉ. मोहन यादव ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी नदी जोड़ो परियोजनाओं की सराहना की। उन्होंने मध्यप्रदेश को “नदियों का मायका” बताते हुए कहा कि सोन और चंबल जैसी नदियां न केवल प्रदेश, बल्कि बिहार जैसे अन्य राज्यों को भी समृद्ध बनाती हैं।

किसान कल्याण और MSP पर सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए भावांतर योजना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की अहमियत बताई। उन्होंने जानकारी दी कि सोयाबीन के लिए MSP और मंडी भाव के अंतर की 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के खातों में अंतरित की गई है, जिससे किसानों को वास्तविक लाभ मिला है।

प्राचीन कृषि परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम

डॉ. यादव ने भीमबेटका का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की कृषि आधारित जीवन पद्धति हजारों वर्षों पुरानी है। उन्होंने अनुसंधान केंद्रों की सराहना करते हुए कहा कि अब शोध केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि फसलों की पोषण गुणवत्ता (Nutrition) पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

‘अन्न देवो भव’ की सांस्कृतिक भावना

मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे यहां केवल ‘अतिथि देवो भव’ ही नहीं, बल्कि ‘अन्न देवो भव’ की भी परंपरा है। अन्न और किसान दोनों ही हमारी सभ्यता की आधारशिला हैं, और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन इसी भावना को आगे बढ़ाता है।

केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे मिशन को सफल

अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार, भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और दलहन-तिलहन मिशन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह सम्मेलन दालों में आत्मनिर्भर भारत, समृद्ध किसान और पोषित राष्ट्र की दिशा में एक मजबूत आधार साबित होगा।

कई राज्यों के कृषि मंत्री हुए शामिल

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के कई राज्यों के कृषि मंत्री शामिल हुए। इनमें ओडिशा से कनकवर्धन सिंह देव, पंजाब से गुरमीत सिंह खुडियन, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, बिहार से राम कृपाल यादव, गुजरात से रमेशभाई कटारा, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप साही, हरियाणा से श्याम सिंह राणा और पश्चिम बंगाल से सोवानदेव चट्टोपाध्याय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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