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संस्कार, नैतिकता और चरित्र से बनती है जीवन की पहचान : CM डॉ. मोहन यादव

राजकोट के उपलेटा में 26वें राष्ट्रकथा शिविर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का प्रेरक संबोधन...

By: Abhinav Tiwari 
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संस्कार, नैतिकता और चरित्र से बनती है जीवन की पहचान : CM डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “किताबी ज्ञान से प्रावीण्य सूची में स्थान तो बन जाता है, लेकिन जीवन में सच्ची पहचान संस्कार, नैतिकता और चरित्र से ही बनती है।” वे गुजरात के राजकोट जिले के उपलेटा में आयोजित 26वें राष्ट्रकथा शिविर को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी अपने जीवन का आधार बनाएं।

राष्ट्रकथा शिविर : राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का मंच

यह राष्ट्रकथा शिविर प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक संत मोरारी बापू के सान्निध्य में आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य युवाओं में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य व्यक्तियों, संतों और युवाओं ने सहभागिता की।

हर श्वास को मानव कल्याण के लिए समर्पित करने का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि “एक-एक श्वास से हमारा जीवन बना है, इसलिए जीवन का हर क्षण अच्छे विचारों, श्रेष्ठ कर्मों और मानव कल्याण के लिए समर्पित होना चाहिए।” उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व को आत्मसात करने पर विशेष बल दिया।

पुस्तक भेंट, पारंपरिक स्वागत और आत्मीय अभिनंदन

राष्ट्रकथा शिविर के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को स्मृति-चिह्न के रूप में पुस्तक भेंट की गई। साथ ही परंपरागत पगड़ी पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया गया। यह सम्मान भारतीय परंपरा और अतिथि-सत्कार की गौरवशाली संस्कृति को दर्शाता है।

तटरक्षक बल की प्रदर्शनी का अवलोकन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 26वें राष्ट्रकथा शिविर में आयोजित तटरक्षक बल की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने देश की सुरक्षा, सेवा और समर्पण में तटरक्षक बल की भूमिका की सराहना करते हुए युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बाद अब भारत ही दुनिया का वह तीसरा देश है, जो हर तरीके से अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता रखता है। इस शिविर के जरिए भारतीय युवाओं में देशभक्ति का भाव जगाने का जो पुनीत काम किया जा रहा है, जो नि:संदेह स्वागत योग्य और अभिनंदनीय है।

युवाओं के लिए मूल्य-आधारित प्रेरणा

26वें राष्ट्रकथा शिविर के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि केवल अकादमिक सफलता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में नैतिकता, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व भी उतने ही आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री का यह संबोधन युवाओं के लिए आत्ममंथन और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरणास्रोत बना।

मां ही हम सभी की पहली गुरु

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में श्री सोमनाथ धाम भी शामिल है। देश में सनातन संस्कृति की धारा सभी क्षेत्रों में बह रही है। राष्ट्रकथा शिविर में स्वामीजी ने देश के विभिन्न प्रांतों से शामिल हुई युवा शक्ति को राष्ट्र के विकास के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश फिर से विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गुरु की महिमा को देखेंगे तो गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। भारत ने हजारों वर्षों से दुनिया को विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में मां का अपना अलग ही स्थान होता है। मां ही हम सभी की पहली गुरु होती हैं। दुनिया में सभी देश अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करते हैंलेकिन अन्य किसी भी देश में मातृ संस्कृति का आधार देखने को नहीं मिलता।

कार्यक्रम में झारखंड राज्य के विधायक मनोज यादवपौलेंड में भारत के पूर्व राजदूत  दीपक वोहरा, एसएन मीणा, आरएस जून,  सुधीर यादव एवं अन्य गणमान्यजन भी उपस्थित थे। शिविर में गुजरात सहित देश के अनेक राज्यों से बड़ी संख्या में आए विद्यार्थियों ने सक्रियतापूर्वक भागीदारी की।

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