रिपोर्ट: सत्यम दुबे
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी ने सूबे में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कहा था कि अपराधी, माफिया या तो यूपी छोड़ दें, याफिर गलत काम करना छोड़ दें। इस ऐलान के बाद सरकार ने सूबे में अपराधियों पर तेजी से शिकंजा कसा है। इसके बाद पुलिस ने अपराधियों को किसी भी कीमत पर छोड़ नहीं रही है।
आपको बता दें कि सूबे में मुठभेड़ का एक दौर शुरू हो गया। पिछले साढ़े चार साल में यूपी पुलिस और अपराधियों के बीच 8472 मुठभेड़ हुई है। इसमें करीब 3302 कथित अपराधियों को गोली मारकर घायल कर दिया, इसकी वजह से कई क्रिमिनल्स लंगड़े हो गए हैं।
मुठभेड़ में 3302 कथित आपराधियों का घायल होना और ज्यादातर मामलों में पैर में गोली लगने से लंगड़े हो जा रहे हैं। यूपी पुलिस की मानें तो मुठभेड़ में अबतक 13 पुलिसकर्मी मारे गए हैं और 1157 घायल हुए हैं। इसकी वजह से 18225 अपराधियों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।
यूपी पुलिस के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने एक समाचार पत्र से कहा कि “पुलिस मुठभेड़ों में घायलों की बड़ी संख्या बताती है कि अपराधियों को मारना पुलिस का प्राथमिक मकसद नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक उद्देश्य अपराधियों को गिरफ्तार करना है।”
बात करें पुलिस के आंकड़ों की तो पश्चिमी यूपी में मेरठ क्षेत्र में सबसे अधिक मुठभेड़ हुए हैं। कुल (2,839) मुठभेड़ में 5,288 गिरफ्तारी हुई है। इसमें मौतों की संख्या 61 और घायलों की संख्या 1,547 है। इसके बाद आगरा है, इस क्षेत्र 1,884 मुठभेड़ों में 4,878 गिरफ्तारियों, 18 मौतों और 218 लोगों के घायल होने के साथ दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर बरेली क्षेत्र है, जहां 1,173 मुठभेड़, 2,642 गिरफ्तारियां, सात मौतें और 299 लोग घायल हुए हैं।
मेरठ जोन में सबसे अधिक पुलिस कर्मी (435) भी घायल हुए। उसके बाद बरेली (224) और गोरखपुर (104) है। कानपुर क्षेत्र में सबसे अधिक पुलिस की मौत दर्ज की गई। गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने के लिए पुलिस ऑपरेशन के दौरान 2020 के बिकरू गांव मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे।