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किसान मुद्दों पर कांग्रेस का हमला, जीतू पटवारी बोले- “कृषि कल्याण वर्ष सिर्फ हेडलाइन बनाने का प्रयास”

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर किसानों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कृषि योजनाओं, बजट खर्च और किसान पंजीयन व्यवस्था पर कई सवाल उठाए।

By: Abhinav Tiwari 
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किसान मुद्दों पर कांग्रेस का हमला, जीतू पटवारी बोले- “कृषि कल्याण वर्ष सिर्फ हेडलाइन बनाने का प्रयास”

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर किसानों के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। इस अवसर पर मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पैनलिस्ट अभय दुबे भी उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता में पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा “कृषि कल्याण वर्ष” मनाने की घोषणा की जा रही है, जबकि पिछले 20 वर्षों से भाजपा सरकार किसानों को केवल वादों के सहारे छलती आई है।

किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा नहीं हुआ पूरा

जीतू पटवारी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले दो दशकों से किसानों की आय दोगुनी करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात करते रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आमदनी बढ़ने के बजाय उनका कर्ज और आत्महत्याओं की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के लगभग 97 प्रतिशत किसान कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं, जो सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल

पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि कई अधिकारी अपने दांव-पेंच से मुख्यमंत्री को प्रभावित कर देते हैं और इससे प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होती है। उनके अनुसार प्रदेश को मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दो वर्षों से प्रदेश की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इसलिए अब जनता उनसे इन दो वर्षों का हिसाब मांग रही है।

भाजपा की चुनावी गारंटियों पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने किसानों को तीन बड़ी गारंटियां दी थीं, लेकिन उनमें से एक भी पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सोयाबीन को 6000 रुपये प्रति क्विंटल, धान को 3100 रुपये और गेहूं को 2700 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया गया था, जो अब तक केवल घोषणा बनकर रह गया है।

कृषि विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी

पटवारी ने कहा कि प्रदेश के कृषि विभाग में लगभग 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। जब विभाग में पर्याप्त कर्मचारी ही नहीं होंगे तो किसानों से जुड़ी योजनाओं को जमीन पर लागू करना मुश्किल हो जाएगा।

केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बजट उपयोग पर सवाल

उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए लगभग 44,891 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा केवल 32,678 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसके साथ ही जो राशि राज्य सरकार को प्राप्त हुई, उसका भी लगभग 40 प्रतिशत खर्च नहीं किया गया, जिसके कारण करीब 17,000 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भी स्थिति चिंताजनक रही। कुल 68,619 करोड़ रुपये के प्रावधान में से मध्यप्रदेश के हिस्से के लगभग 44,355 करोड़ रुपये बनते थे, लेकिन 20 जनवरी 2026 तक केवल 9,753 करोड़ रुपये ही जारी हुए।

कई कृषि योजनाओं में आवंटन शून्य

पटवारी ने कहा कि कई महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं में बजट का उपयोग नहीं हुआ। उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषि यंत्रीकरण योजना, कृषि विस्तार योजना, फार्म वाटर मैनेजमेंट, सॉयल हेल्थ मैनेजमेंट और नेशनल ऑयलसीड्स मिशन जैसी योजनाओं में बजट का प्रावधान होने के बावजूद आवंटन शून्य रहा।

CAG रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताएं

उन्होंने कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में भी कृषि विभाग से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। फर्टिलाइजर डेवलपमेंट फंड का लगभग 90 प्रतिशत पैसा वाहनों, ड्राइवरों के वेतन और रखरखाव पर खर्च किया गया, जबकि किसानों तक केवल 10 प्रतिशत राशि ही पहुंची। इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन (FPO) योजना में भी अनियमितताओं की बात सामने आई है और विभिन्न सरकारी इकाइयों में 3,157 वित्तीय अनियमितताओं के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 40 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी बताई गई है।

किसानों के पंजीयन में अव्यवस्था का आरोप

पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में किसानों के पंजीयन को लेकर भारी अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पंजीयन की अंतिम तिथि नजदीक है और किसान अपनी उपज के पंजीयन के लिए परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी किसानों की शिकायतों के लिए एक टोल-फ्री नंबर जारी कर दे, तो कुछ ही दिनों में हजारों शिकायतें सामने आ सकती हैं।

आने वाले दिनों में कांग्रेस करेगी खुलासे

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले सात दिनों में कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए बजट और कृषि संबंधी दावों की सच्चाई क्रमवार जनता के सामने रखेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों की समस्याओं को लेकर विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रही है ताकि किसानों की आवाज को मजबूती से उठाया जा सके।

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