रिपोर्ट:पायल जोशी
देहरादून : दीपावली के चार दिन बाद ही छठ का आरंभ शुरु हो जाता है, इसे लेकर नदी घाटों को सजाया जाता है। वहीं व्रतियां घाटों पर जाकर सूरज भगवान अपना अर्घ्य देती है। हालांकि इसके बाद कई जगहों से ऐसे दृश्य सामने आये है, जिससे एक बार फिर नदी और तालाबों के जलों को दूषित होने का भय सताने लगा है। एक ऐसा ही दृश्य उत्तराखंड के टौंस नदी पर भी देखने को मिला। जहां जगह-जगह पर पूजन सामग्री बिखरी पड़ी थी।
इस समस्या को देखते हुए हेस्को के संस्थापक डा. अनिल जोशी के निर्देश पर बाल दिवस के मौके पर यूथ हेस्को की टीम ने नदी में सफाई अभियान चलाया। जिसका नेतृत्व अमोघ नारायण मीणा कर रहे थे। युवाओं ने देखा की नदी में जगह-जगह प्लास्टिक, मूर्तियां, मालाएं, पोस्टर, कपड़े आदि फेंके गए हैं। जिससे नदी पूरी गंदी होने लगी थी, और जगह-जगह पर नदी के किनारे कचरा जमा होने लगा था।
इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं ने नंदा की चौकी से सेलाकुई तक के करीब एक किलोमीटर भाग में बिखरी पड़ी सामग्री को एकत्रित किया और उसके निस्तारण के लिए उसे निकट के कूड़ेदान में डाला गया। हेस्को के सदस्य अमोघ ने जनता से अपील की कि वह नदियों में कूड़ा या किसी भी अन्य तरह की सामग्री न फेंके।
साथ ही नगर निगम और दून कैंट बोर्ड से मांग की कि नदी किनारे कूड़े फेंकने की प्रवृत्ति रोकने के लिए ठोस अभियान चलाया जाए। इस दिशा में नदी किनारे जनता को जागरूक करने वाले होर्डिंग्स लगाने का सुझाव भी दिया गया। बता दें की अभियान में सामाजिक कार्यकर्त्ता सन्नी कुमार, विधि छात्र, नीरज, रोहित, शिवम, अंजनी, अंकित सिंह समेत 30 से अधिक युवा शामिल हैं।