मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचकर कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए संचालित रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों से अभियान की वर्तमान स्थिति, अब तक मिली सफलता और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।

शाजापुर जिले में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत अब तक 1236 से अधिक कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा सैकड़ों नीलगायों का भी रेस्क्यू किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना है।

किसानों की समस्याओं और खेतों में वन्यजीवों के कारण होने वाले नुकसान को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष बोमा पद्धति के माध्यम से कृष्णमृगों और नीलगायों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान शुरू किया था। इस पद्धति में वन्यजीवों को सावधानीपूर्वक निर्धारित घेरे में लाकर सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जाता है, ताकि उन्हें कम से कम परेशानी हो।
शाजापुर जिले में बड़ी संख्या में कृष्णमृग और नीलगायों की मौजूदगी के कारण किसानों को फसलों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में रेस्क्यू अभियान के जरिए वन्यजीवों के संरक्षण और कृषि गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अभियान का निरीक्षण किए जाने से वन्यजीव संरक्षण और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए चल रही इस पहल का महत्व सामने आया है। सरकार का प्रयास है कि वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान मिले और किसानों की मेहनत से तैयार फसलों को भी नुकसान से बचाया जा सके।