जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित नवाचार पर केंद्रित कृषि मंथन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबोधित किया।उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत हमने पूरे वर्ष के विविध प्रकार के अलग-अलग आयोजन करने का निर्णय लिया है। इसीलिए अलग-अलग विभागों को सम्मिलित किया गया है। सबकी कॉमन एक्टिविटी को एक मंच देते हुए पूरे वर्ष विविधता के साथ अनेकता में एकता के भाव के आधार पर कृषक कल्याण की आज के इस अनूठे कार्यक्रम के साथ किसी भी कृषि विश्वविद्याल में जो कल्पना हो सकती है वह सब कुछ इस विश्वविद्यालय में दिखाई दिया।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जिस प्रकार से देश भर में हर क्षेत्र में प्रगति हो रही है खासकर कृषि और कृषि के साथ जुड़े व्यवसाय को बड़े सम्मान के साथ देखा गया है। इसीलिए कृषि के क्षेत्र में हजारों लाखों सालों से इस देश की उन्नत अवस्था है। आज के समय में कई सारे देशों में कृषि की बात आती है। लेकिन हमारे ज्ञान विज्ञान के बलबूते पर हजारों साल से ऋषियों मुनियों ने हमको प्रकृति के साथ जीने में जो कृषि का मार्ग दिखाया है। जब हम कृषि की बात करते हैं तो गांव आधारित जीवन पद्धति में आते हैं और ग्रामीण जीवन पद्धति में हमारे ऑटोनोमस जीवन पद्धति के साथ, सूर्योदय और धरती माता को प्रणाम करते हैं। एक दौर में हमे भोजन की कमी थी और अमेरिका का लाल गेंहूं खाने को मजबूर थे और आज वैज्ञानिकों के कृषि क्षेत्र में विभिन्न अनुसंधानों के बलबूते पर धीरे-धीरे हर क्षेत्र में नई प्रगति के नए सोपान की नई ऊंचाइयां हासिल करने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई को याद करते हुए कहा कि उन्होंने नदी जोड़ो अभियान की कल्पना की थी। 1974 से नर्मदा वैली से सारा क्षेत्र सिंचाई और बाकी चीजों से समृद्ध हो सकता था लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक उठापटक और सोच की कमी के कारण से योजना नहीं बन पाई। जो योजना 20 साल बन सकती थी वह नरेंद्र मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री बनते ही अपने ही संसाधनों से सरदार सरोबर डैम पूरा किया और उसके बाद हमारे प्रदेश की भी धारा बदली। आज नर्मदा वैली के सारे डैम बनाकर पूरे देश में तेज गति से आगे बढ़ने में मध्य प्रदेश का नाम आया है। मां नर्मदा तो जीवन रेखा है। ऐसे में मां नर्मदा की जल राशि से मध्य प्रदेश भी सरसब्ज है और बाकी राज्यों में भी हर कंठ की प्यास बुझाने और घर की व्यवस्था करने के लिए खेती से लेकर उद्योगों की रचनाओं में देश ने अगर प्रगति के सोपान चढ़े तो बड़ा आधार नर्मदा जी हैं।

यद्यपि हमने कृषि के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है लेकिन फिर भी यहां पर खेती की बहुत संभावनाए हैं। किसानों ने अपने संशाधनों के बलबूते पर मध्यप्रदेश को दलहन में नंबर वन बनाया है। अब यहां के किसान एक दो नहीं बल्कि तीसरी फसल की ओर भी बढ़ रहे हैं। और नए नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि हमारे परपरागत बीजों के बजाय नए उन्नत किस्म के बीजों मे भी आपकी मदद चाहिए। हम अपने संशाधनों का बेहतर से बेहतर उपयोग करें। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार पशुपालन से लेकर विभिन्न प्रकार की खेती आधारित सभी विभागों को जोड़कर समेकित रूप से काम कर रहे हैं। आधुनिक यंत्रों की भी कोई कमी नहीं है। मध्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती का रकवा भी बढ़ा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार भी पहली बार कोदों कुटकी के उपार्जन करने की तरफ आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां 9 फीसदी दूध का उत्पादन होता है। अब हमने इसे 20 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। खपत भी होगी इसीलिए सरकार ने कक्षा एक से लेकर कक्षा 8 तक बच्चों को सरकारी स्कूलों में दूध पिलाने की व्यवस्था की है। साथ ही फूड प्रोसेसिंग की भी सभी इकाइयों को मदद दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जबलपुर में कृषिविश्वविद्याल के प्रशासनिक भवन का लोकार्पण हुआ। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक हजार कृषि सखियों को प्रशिक्षण का सौभाग्य मिला है। 10 स्टार्ट अप को एक करोड़ आठ लाख रुपयों के आदेश पत्र का वितरण हुआ है। नरसिंहपुर में गन्ने की एक नई यूनिट का शुभारंभ हुआ।