रिपोर्ट: नंदनी तोदी
लखनऊ: केंद्र के कृषि कानून को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। दिल्ली के लाल किले पर 26 जनवरी को हुए हिंसक ट्रेक्टर रैली के बाद जहां एक तरफ कई बड़े नेताओं ने निंदा की , तो वहीं कई केंद्र पर निशाना साध रहें हैं। इसी बीच बसपा सुप्रीमो भी सामने आईं हैं और केंद्र पर सियासी वार किया है।
दरअसल, मायावती ने अपने लगातार ट्वीट्स में केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि, “बी.एस.पी. ने, देश के आन्दोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज मा. राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।”
1. बी.एस.पी. ने, देश के आन्दोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज मा. राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। 1/2
— Mayawati (@Mayawati) January 29, 2021
उन्होंने आगे लिखा, ” कृषि कानूनों को वापस लेकर दिल्ली आदि में स्थिति को सामान्य करने का केन्द्र से पुनः अनुरोध तथा गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को बलि का बकरा न बनाए। इस मामले में यूपी के बीकेयू व अन्य नेताओं की आपत्ति में भी काफी सच्चाई। सरकार ध्यान दे।”
2. साथ ही, कृषि कानूनों को वापस लेकर दिल्ली आदि में स्थिति को सामान्य करने का केन्द्र से पुनः अनुरोध तथा गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को बलि का बकरा न बनाए। इस मामले में यूपी के बीकेयू व अन्य नेताओं की आपत्ति में भी काफी सच्चाई। सरकार ध्यान दे। 2/2
— Mayawati (@Mayawati) January 29, 2021
आपको बता दें, मायावती ने इससे पहले लाल क़िले में हुए हिंसक प्रदर्शन पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि,” देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की हुई ट्रैक्टर रैली के दौरान जो कुछ भी हुआ, वह कतई भी नहीं होना चाहिए था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण तथा केन्द्र की सरकार को भी इसे अति-गंभीरता से ज़रूर लेना चाहिए।”