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कानपुर में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा, 2830 अपात्रों को दे डाले 7.26 करोड़ रुपये, शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में धांधली

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

कानपुर: यूपी के कानपुर से फर्जीवाड़े का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे। यहां समाज कल्याण विभाग ने पिछले दो सालों में 2830 अपात्रों को शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना के तहत 7.26 करोड़ रुपये की धनराशि बांट दी है। इतना ही नहीं दोनों योजना में कुल लाभार्थियों की संख्या 6996 है। इन सभी को धनराशि दी भी जा चुकी है।

आपको बता दें कि 51 अफसरों ने दोनों योजनाओं के लाभार्थियों के आवेदन पत्रों का सत्यापन किया है। अधिकारियों ने जो जांच रिपोर्ट तैयार की है, उसमें इस फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं  मुख्य विकास अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार ने फरवरी में दोनों योजनाओं की रैंडम जांच की थी तो शादी अनुदान में तीन लाभार्थी और पारिवारिक लाभ में पांच में से तीन लाभार्थी फर्जी मिले थे।

मुख्य विकास अधिकारी के जॉच में जब फर्जीवाड़ा सामने आया तो उन्होने 51 अफसरों को वर्ष 2019-20, 2020-21 में दोनों योजनाओं के लाभार्थियों के आवेदन पत्रों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। जांच अधिकारी परियोजना निदेशक, डीआरडीए (डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी) केके पांडेय ने बताया कि सभी अफसरों ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें लगभग 60 फीसदी लाभार्थी अपात्र, फर्जी मिले हैं। 

आपको बता दें कि जॉच में सामने आया कि शादी अनुदान योजना के कुल 2230 लाभार्थियों में सिर्फ 1000 पात्र मिले हैं। बाकी 1230 अपात्र मिले हैं। इनमें से दो सौ लोग गरीबी रेखा से ऊपर वाले हैं। 800 लोगों के पते गलत मिले। 25 लाभार्थी ऐसे हैं जिनकी शादी ही नहीं हुई। नौ लोग पहले ही शादी कर चुके हैं। 35 लाभार्थियों ने अभिलेख ही नहीं दिखाए। इय योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को विवाह के लिए 20 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। 

वहीं पारिवारिक लाभ योजना के कुल 4766 लाभार्थियों में 1600 लाभार्थी फर्जी मिले हैं। जबकि 1200 लोगों का पता ही नहीं लिखा मिला। गरीबी रेखा से ऊपर वाले 200 लाभार्थी मिले। पांच लोभार्थी ऐसे भी मिले जिनकी मृत्यु को एक साल से अधिक समय हो गया था। वहीं 50 लोग मृत्यु प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज नहीं दिखा सके हैं। इस योजना के तहत सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के मुखिया के निधन पर परिवार को 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। निधन के एक साल के अंदर आवेदन करना पड़ता है।

सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट में शादी अनुदान के 90 और पारिवारिक लाभ योजना के 110 लाभार्थी ऐसे मिले हैं जिनका कोई रिकॉर्ड ही विभाग के पास नहीं है। इस स्थिति में सवाल यह है कि बिना आवेदन दो सौ लोगों का पैसा किसको दिया गया है। 

इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद प्रशासन ने अब तक तीन लेखवालों, एक कानून गो और एक पटल सहायिका को ही निलंबित किया है। आपको बता दें कि योजना में आवेदन करने के बाद लाभार्थी के आवेदन पत्रों की जांच लेखपाल और कानूनगो करते हैं। जांच करने के बाद ये रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को भेजते हैं। वहां पर काम कर रहे बाबू तय करते हैं कि किसको अनुदान देना है या नहीं। आवेदन पत्र पर पटल सहायक हस्ताक्षर करता है, इसके बाद ही समाज कल्याण विभाग लाभार्थी के खाते में सीधे पैसा भेज देता है। लेकिन अब तक विभाग के अधिकारियों और क्लर्कों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। 

मुख्य विकास अधिकारी  डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि  फाइनल रिपोर्ट एडीएम फाइनेंस वीरेंद्र पांडेय अभी मुझे सौंपेंगे। इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन स्तर पर कार्रवाई तय होगी।

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