Home विदेश 8 महीने बाद चीन का बड़ा कबूलनामा, छिपा रहा था जिस सच को आखिरकार मानना पड़ा…

8 महीने बाद चीन का बड़ा कबूलनामा, छिपा रहा था जिस सच को आखिरकार मानना पड़ा…

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नई दिल्ली : अक्सर झूठ बोलकर अपना मुंह छिपाने वाले चीन को आखिरकार उस सच्च को कबूलना ही पड़ा जिसे वो 8 महीने से छिपा रहा था। चीन के इस कबूलनामे के बाद एक बार फिर उसके झूठ की पोल खोल दी है। आपको बता दें कि चीन ने पहली बार यह आधिकारिक तौर पर माना है कि गलवान घाटी की हिंसा में उसके 4 सैनिक मारे गए थे और एक सैनिक घायल हुआ था।

चीन के सरकारी टीवी, सीजीटीएन ने बताया कि शुक्रवार को सीएमसी ने मारे गए इन सभी सैनिकों को फ़र्स्ट क्लास मेरिट साइटेशन और मानद उपाधि से सम्मानित किया है। सीजीटीएन के मुताबिक, पीएलए आर्मी के शहीद चेन होंगजुन (बटालियन कमांडर) को ‘हीरो’ की उपाधि दी गई है तो वहीं तीन अन्य शहीद सैनिक चेन जियानगॉन्ग, जिओ सियुआन और वांग जुओरन को फ़र्स्ट क्लास मेरिट साइटेशन दिया गया है। चीन के जवानों का नेतृत्व करने वाले एक कर्नल, क्यू फेबाओ (रेजीमेंटल कमांडर) जो हिंसा के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे उन्हें ‘हीरो कर्नल’ की उपाधि से सम्मानित किया गया है।

हालांकि इस दौरान सीजीटीएन ने गलवान का नाम नहीं लिया है और कहा कि ‘जून के महीने में एक सीमा विवाद’ में ये क्षति हुई है। लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने साफ लिखा है कि गलवान घाटी की हिंसा (15-16 जून 2020) में ये हानि हुई है। वहीं भारत और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का मानना है कि चीन के कम से कम 45 सैनिक गलवान घाटी की हिंसा में मारे गए थे। बता दें कि सीएमसी ने मारे गए कुल सैनिकों की संख्या नहीं बताई है, उन सैनिकों की जानकारी दी गई है जिन्हें बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया है।

आपको बता दें कि चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) ने ये सम्मान पीएलए सैनिकों को दिया है। बता दें कि सीएमसी, चीन की सबसे बड़ी सैन्य संस्था है और चीन के राष्ट्रपति, शी जिनपिंग इसके चैयरमैन हैं। गौरतलब है कि गलवान घाटी की हिंसा में भारतीय‌ सेना के कुल 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे, उनमें से छह को वीरता मेडल से नवाजा गया था। कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र और पांच अन्य सैनिकों (चार मरणोपरांत) को वीर चक्र दिया गया था।

बता दें कि चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) ने शुक्रवार को इन सभी सैनिकों को बहादुरी पदक से नवाजा। हालांकि, भारत और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों का मानना है कि इस हिंसा में चीन के 45 सैनिक मारे गए थे। अगर हम LAC के वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो नौ महीने के टकराव के बाद भारत और चीन पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर डिसइंगेजमेंट के लिए तैयार हो गए हैं और दोनों देशों की सेनाओं ने फ्रंटलाइन से पीछे हटना शुरू कर दिया है।

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