1. हिन्दी समाचार
  2. मध्य प्रदेश
  3. भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है : CM डॉ. मोहन

भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है : CM डॉ. मोहन

भारत भवन के 44वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा-भारत भवन सिर्फ भवन नहीं, जीवन की रचना है। 10 दिवसीय समारोह का भव्य शुभारंभ।

By: Abhinav Tiwari 
Updated:
भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है : CM डॉ. मोहन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत भवन केवल एक भवन या मंच नहीं, बल्कि जीवन की रचना है। इसका गौरवशाली अतीत आज पुनः जीवंत हो रहा है। उन्होंने कहा कि कला समाज को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। कला से दूरियाँ मिटती हैं, मन का बोझ हल्का होता है और सामाजिक सौहार्द को बल मिलता है। एक संवेदनशील, सकारात्मक और समरस समाज के निर्माण में कला की भूमिका सर्वकालिक और अमूल्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत भवन के 44वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित गरिमामय समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर 10 दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ किया, जो 22 फरवरी तक चलेगा।

कला, सृजन, साधना और संवाद का जीवंत केंद्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भवन वर्षों से कला, कलाकारों और रचनाधर्मियों की पितृ संस्था की तरह कार्य कर रहा है। 44 वर्ष की आयु तरुणाई का प्रतीक है और हमारी कामना है कि भारत भवन की ख्याति आने वाले 440 वर्षों तक इसी तरह बनी रहे। यह संस्थान कला, सृजन, साधना और संवाद का ऐसा केंद्र है, जिसने भारतीय संस्कृति की जड़ों को और मजबूत किया है।

पं. हरिप्रसाद चौरसिया और भूरीबाई का सम्मान

समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया और भारत भवन की न्यासी सदस्य पद्मश्री भूरीबाई को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पं. चौरसिया के हाथों में आते ही काष्ठ की बांसुरी भी प्राणवान हो उठती है। निर्जीव वस्तु का सजीव हो जाना ही कला और साधना की पहचान है।

भारत भवन की भूमिका सदैव सराहनीय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कला और संस्कृति के संरक्षण में भारत भवन की भूमिका हमेशा प्रशंसनीय रही है। बीते 44 वर्षों में इस संस्थान ने जिस निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ कलाकारों को मंच दिया है, उसने भारत भवन को देश के विशिष्ट सांस्कृतिक संस्थानों की श्रेणी में स्थापित किया है। यहां स्थापित कलाकारों के साथ-साथ नई और उभरती प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं। लोक परंपराओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर भारत भवन ने भारतीय संस्कृति को नई ऊर्जा दी है।

मुक्त और शिष्ट सांस्कृतिक प्रवाह का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भवन आज मुक्त, शिष्ट और सृजनात्मक सांस्कृतिक प्रवाह का पर्याय बन चुका है। यहां सुर-ताल, लोक और शास्त्रीय संगीत, नाट्य मंचन तथा विभिन्न ललित एवं रूपंकर कलाओं के लिए सुंदर, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त मंच उपलब्ध है। भारत भवन ने भोपाल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

भोपाल की सांस्कृतिक आत्मा

अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं गृह तथा भारत भवन के न्यासी सचिव शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि भारत भवन केवल एक सांस्कृतिक परिसर नहीं, बल्कि भोपाल की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। इसकी स्थापना 13 फरवरी 1982 को हुई थी, और तब से यह भारतीय परंपरा, लोक जीवन और समकालीन कला सृजन के समन्वय का सशक्त केंद्र बना हुआ है।

दस दिवसीय स्थापना दिवस समारोह

10 दिवसीय समारोह के अंतर्गत शास्त्रीय एवं लोक संगीत, नृत्य, वादन, गायन, कविता-कहानी, नाट्य मंचन, सिनेमा, विमर्श, कला प्रदर्शनी और कला शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को कला और संस्कृति से जोड़ना है। भारी संख्या में कला प्रेमियों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि भारत भवन आज भी उतना ही जीवंत और प्रेरणादायी है, जितना अपनी स्थापना के समय था।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...