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एशिया के सबसे बड़े थर्मल प्लांट एनटीपीसी विंध्यनगर पर पर्यावरण से खिलवाड़ के आरोप

पेड़ों की कटाई और फ्लाई ऐश प्रदूषण से स्थानीय लोगों में आक्रोश

By: Abhinav Tiwari 
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एशिया के सबसे बड़े थर्मल प्लांट एनटीपीसी विंध्यनगर पर पर्यावरण से खिलवाड़ के आरोप

एशिया के सबसे बड़े थर्मल पावर प्लांट एनटीपीसी विंध्यनगर एक बार फिर पर्यावरणीय लापरवाही को लेकर विवादों में आ गया है। सिंगरौली जिले के विंध्यनगर क्षेत्र में स्थानीय लोग एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश जता रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाए गए हजारों पेड़ों को अब सोलर प्लांट लगाने के लिए काटा जा रहा है, जिससे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।

हरित पट्टी पर कुल्हाड़ी, सोलर प्लांट के लिए कटे पेड़

स्थानीय नागरिकों के अनुसार विंध्यनगर से शक्तिनगर को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग के किनारे एनटीपीसी की जमीन पर प्रदूषण नियंत्रण और हरित पट्टी विकसित करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया था। इन पेड़ों का उद्देश्य क्षेत्र को प्रदूषण से राहत देना था, लेकिन अब उन्हीं पेड़ों को सोलर प्लांट की स्थापना के लिए काटे जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

पहले से प्रदूषण की मार झेल रहे गांव

ग्रामीणों का कहना है कि जुआड़ी, जयनगर और तेलगवां जैसे इलाके पहले ही औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित हैं। इसके साथ ही एनटीपीसी से निकलने वाली फ्लाई ऐश की ढुलाई को लेकर भी लंबे समय से नियमों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। लोगों का कहना है कि इन समस्याओं के बीच पेड़ों की कटाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।

हवा के साथ उड़ती फ्लाई ऐश, बढ़ रही बीमारियां

स्थानीय निवासियों के अनुसार तेज हवा और आंधी के दौरान फ्लाई ऐश उड़कर आसपास के गांवों तक पहुंच जाती है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों में सांस से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घरों, खेतों और जल स्रोतों तक फ्लाई ऐश पहुंचने से जीवन-यापन कठिन होता जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के दावे या नियमों की अनदेखी?

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब क्षेत्र पहले से ही भारी प्रदूषण झेल रहा है, तो हरित पट्टी के रूप में लगाए गए पेड़ों को काटना कितना उचित है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच करें और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर ठोस कार्रवाई करें। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच नियमों की अनदेखी हो रही है और क्या प्रशासन इस मामले में कोई सख्त कदम उठाएगा।

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