1. हिन्दी समाचार
  2. विदेश
  3. चीन की एक और चालबाजी, भारतीय सीमा के पास तैयार कर रहा एयरपोर्ट, इन इलाकों पर हमले की साजिश

चीन की एक और चालबाजी, भारतीय सीमा के पास तैयार कर रहा एयरपोर्ट, इन इलाकों पर हमले की साजिश

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

रिपोर्ट:सत्यम दुबे

नई दिल्ली: चीन अपने चालबाजी से बाज नहीं आ रहा है, अब वह अपने जिनजियांग प्रांत में अपना सबसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट तैयार करने में जोरो से लगा हुआ है। लगभग 10500 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर बनने वाले इस एयरपोर्ट पर चीन ने अपने फ़ाइटर एयरक्राफ्ट और बड़े ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को उतारकर इसका परीक्षण किया है। इस एयरपोर्ट का प्रयोग चीन भारत की सीमा पर मजबूती बढ़ा रहा है।  

आपको बता दें कि पिछले साल मई के महीने में चीन ने पाकिस्तान को भरोसा दिलाया था कि एक साल में वो ये एयरपोर्ट पूरा कर लेगा जिससे गिलगिट-बाल्टिस्तान में भारत के किसी भी कदम का मुक़ाबला करने को तैयार रहेगा। इस एकरपोर्ट की भौगोलिक सीमा को देखें तो एयरपोर्ट पाक अधिकृत कश्मीर के काफी नजदीक है। यहां से चीन न केवल पीओके बल्कि लद्दाख और उत्तरी-पश्चिमी भारत तक आसानी से हमले कर सकता है। इसके साथ ही चीन इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल POK में अपार खनिज संपदा की लूट के लिए भी करना चाहता है।

इसके अलावा चीन ये एयरपोर्ट ताशकरगन में बना रहा है जो रणनैतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण स्थान पर है। यहां से पाकिस्तान की सीमा खुंजेराब मात्र 120 किमी दूर है और सबसे क़रीब का बड़ा चीनी एयरपोर्ट काशगर यहां से 230 किमी है। ताशकरगन चीन,पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमा के पास है और चीनी इकोनॉमिक कॉरीडोर के तहत बनाए जाने वाले काराकोरम हाईवे पर पड़ता है। आपको बता दें कि जब भारत ने 2020 से अपने रेडियो ब्रॉडकास्ट में पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ गिलगित-बाल्टिस्तान के मौसम की जानकारियां प्रसारित करना शुरू किया तो चीन ने पाकिस्तान को हौसला देने के लिए इस एयरकोर्ट के निर्माण के  काम को तेज़ कर दिया।

POK की सीमा पर बनें इस एयरपोर्ट से लेह की दूरी मात्र 455 किमी और श्रीनगर की केवल 413 किमी है, इसका सीधा मतलब यहा है कि यहां से चीनी फ़ाइटर एयरक्राफ्ट बहुत आसानी से भारतीय सेनाओं के किसी भी अभियान को निशाना बना सकते हैं। इतनी ऊंचाई पर हवा का घनत्व बहुत कम होने के कारण फ़ाइटर एयरक्राफ्ट के लिए पूरे हथियारों के साथ लंबी दूरी तक हमले कर पाना संभव नहीं होता इसलिए आसपास किसी एयरबेस का होना हमले में मदद करता है।

इस एयरपोर्ट के हवाई पट्टी की बात करें तो यहां कि हवाई पट्टी 3800 मीटर लंबी और 45 मीटर लंबी है इसलिए यहां पर बड़े एयरक्राफ्ट भी आसानी से उतर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो हाल में चीन ने अपने सबसे आधुनिक फ़ाइटर J-20 और सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट Y-20 को उतार चुका है। ये एयरपोर्ट अभी ज़िनज़ियांग के होतान, काशगर और न्यागरी-गुरगुंसा एयरबेसों को मुकाबले भारत के ज्यादा क़रीब है।

आपको बता दें कि ताशकरगन अभी तक एक छोटा सा शहर है जिसकी आबादी केवल 50000 है। POK के बहुत क़रीब होने के कारण चीन इसे अपने बड़े सैनिक बेस के तौर पर विकसित कर रहा है। इसके पीछे चीन की मंशा POK में भारत की किसी कार्रवाई के अंदेशे से निबटने के साथ-साथ खनिज की लूट की भी है।

POK के गिलगित-बाल्टिस्तान में सोना, यूरेनियम के अलावा मॉलीडेनम का भंडार है। मॉलीडेनम दुर्लभ खनिज है जिसका इस्तेमाल टैंकों के लिए बेहद मज़बूत स्टील बनाने के साथ-साथ स्पेस साइंस में भी होता है। पीओके के लिए हुंज़ा नागर में भी यूरेनियम के भंडार हैं। पाकिस्तान ने लगभग 2000 चीनी (China) कंपनियों को यहां खनन करने की लीज़ दे दी है।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
RNI News Ads