1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. विवाद बढ़ने के बाद शिक्षामंत्री के भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से दिया इस्तीफा, गरीब कोटे से हुई थी नियुक्ति

विवाद बढ़ने के बाद शिक्षामंत्री के भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से दिया इस्तीफा, गरीब कोटे से हुई थी नियुक्ति

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

लखनऊ: यूपी में उस वक्त सरकार पर आरोप-प्रत्योप का सिलसिला शुरु हो गया, जब बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई की नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हो गया। खास बात यह है कि उनकी नियुक्ति EWS कोटे से कू गई थी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर लगातार बवाल मचा हुआ था। बुधवार को मंत्री के भाई ने  असिस्टेंट प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया है।

दरअसल, राज्यमंत्री सतीश चंद्रर् द्विवेदी के गृह जनपद सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में उनके भाई की नियुक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर की गई थी। जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर मामला छाया हुआ है। जब मामला तूल पकड़ा तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रमाण के आधार पर नियुक्ति देने की बात की थी। इसके बाद प्रदेश की कई हस्तियों ने प्रमाण पत्र के जांच की मांग की थी।

आपको बता दें कि मंत्री के भाई अरुण द्विवेदी की नियुक्ति EWS कोटे के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुई थी। मिली जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए करीब 150 आवेदन प्राप्त हुए थे। जिसमें मेरिट के आधार पर चयनित दस आवेदकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। उसमें मंत्री के भाई अरुण द्विवेदी का नाम वरीयता सूची में दूसरे नंबर था। इसके बाद सोशल मीडिया पर मंत्री के भाई को बधाई का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं लोगो ने आलोचना भी की।

वहीं भाई की नियुक्ति को लेकर छिड़े विवाद पर मंत्री सतीश द्विवेदी ने भी सफाई दी थी, उन्होंने कहा था कि जिसे भी इस बारे में आपत्ति हो वो जांच करवा सकता है। वह एक अभ्यर्थी के रुप में आवेदन किया और विवि ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए चयन किया। इस मामले मेरा कोई हस्तक्षेप नहीं है। मैं विधायक और मंत्री हूं लेकिन मेरी आर्थिक स्थिति से मेरे भाई को आंकना उचित नहीं है।

अरुण द्विवेदी की पत्नी डॉ.विदुषी दीक्षित मोतिहारी जनपद के एमएस कॉलेज में मनोविज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। एमएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि डॉ विदुषी की बहाली बीपीएससी के माध्यम से 2017 में हुई थी। वे यहां मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि सातवें वेतनमान के बाद उनका वेतन व अन्य भत्ता के साथ 70 हजार से अधिक है।

विवाद बढ़ने के बाद जांच में पता चला कि अरुण द्विवेदी का EWS प्रमाणपत्र 2019 में जारी हुआ था। इसी प्रमाण पत्र पर उन्हें 2021 में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नौकरी मिली। यह प्रमाण पत्र केवल 2020 तक ही मान्य था।

इस मामले पर सूबे में राजनीति भी चरण पर है। कांग्रेस की यूपी प्रभारी व महासचिव प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर सीधा निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि यूपी सरकार के मंत्री आम लोगों की मदद करने से तो नदारद दिख रहे हैं लेकिन आपदा में अवसर हड़पने में पीछे नहीं हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई नियुक्ति पा गए और लाखों युवा यूपी में रोजगार की बांट जोह रहे हैं लेकिन नौकरी ‘आपदा में अवसर’ वालों की लग रही है।

उन्होंने कहा था कि ये वही मंत्री हैं, जिन्होंने चुनाव ड्यूटी में कोरोना से मारे गए शिक्षकों की संख्या को नकार दिया और इसे विपक्ष की साजिश बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा था कि क्या वह इस पर एक्शन लेंगे?

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
RNI News Ads