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नालंदा के ऐतिहासिक गणेशोत्सव पर प्रशासनिक पेंच, आयोजकों ने रखी अपनी मांग

नालंदा के बिहारशरीफ स्थित सोहसराय में 1932 से चली आ रही गणेश पूजा परंपरा के बीच इस बार सामान्य साउंड सिस्टम और भक्ति जागरण की अनुमति को लेकर आयोजकों की चिंता सामने आई है। आयोजक डीजे प्रतिबंध का पालन करते हुए नियमों के तहत लाउडस्पीकर और जागरण की अनुमति मांग रहे हैं। सदर एसडीओ ने आवेदन मिलने पर नियमानुसार अनुमति देने की बात कही है।

By: Nivedita 
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नालंदा के ऐतिहासिक गणेशोत्सव पर प्रशासनिक पेंच, आयोजकों ने रखी अपनी मांग

नालंदा :  जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के प्रमुख कारोबारी क्षेत्र सोहसराय में इस बार गणेशोत्सव के आयोजन को लेकर प्रशासनिक अनुमति का मुद्दा चर्चा में है। आयोजकों का कहना है कि वे डीजे पर प्रतिबंध के नियमों का पालन करते आए हैं, लेकिन सामान्य साउंड सिस्टम और भक्ति जागरण के लिए अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

1932 में शुरू हुई थी सार्वजनिक गणेश पूजा

सोहसराय में सार्वजनिक गणेश पूजा की शुरुआत वर्ष 1932 में हुई थी। उस दौर में यह क्षेत्र आलू-प्याज के बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचान रखता था। स्थानीय कारोबारियों का दूसरे राज्यों, खासकर महाराष्ट्र, से व्यापारिक संपर्क था।महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा से प्रभावित होकर सोहसराय के व्यापारियों ने भी सार्वजनिक रूप से गणेश पूजा शुरू की। इसी क्रम में यहां पहली बार गोला गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई थी।

आज भी जारी है पुरानी परंपरा

श्री गोला गणेश पूजा समिति के अध्यक्ष विनीत कुमार के मुताबिक, समय के साथ बाजार समिति और व्यापारिक गतिविधियों का स्वरूप बदल गया, लेकिन पूर्वजों द्वारा शुरू की गई पूजा की परंपरा आज भी कायम है। उनके अनुसार, सोहसराय में गणेशोत्सव करीब 14 दिनों तक चलता है। गणेश चतुर्थी के दिन प्रतिमा स्थापना के बाद नियमित रूप से सुबह-शाम आरती, भजन और महाप्रसाद का आयोजन होता है। उत्सव के समापन पर शोभायात्रा निकालकर प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

डीजे पर रोक स्वीकार, साउंड सिस्टम को लेकर सवाल

सोहसराय साईं मंदिर के पास वर्ष 2000 से गणेश पूजा आयोजित करने वाली समिति के सदस्य पिंटू कुमार का कहना है कि समिति पिछले कुछ वर्षों से डीजे पर लागू प्रतिबंध का पालन करती रही है। हालांकि, उनका कहना है कि इस बार सामान्य साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति को लेकर भी परेशानी सामने आ रही है। समिति की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने और प्रशासन की शर्तों का पालन करने की बात कही गई है।

 

1960 से गणेश प्रतिमा स्थापित कर रहा क्रांति युवा संघ

कटहल टोला, मनिहारी गली और हनुमान मोड़ क्षेत्र में क्रांति युवा संघ भी लंबे समय से गणेश पूजा आयोजित करता आ रहा है। समिति के मुताबिक, वर्ष 1960 से यहां गणेश प्रतिमा स्थापित की जा रही है। समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, पहले गणेशोत्सव के दौरान बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। बाद में विभिन्न प्रतिबंधों के चलते आयोजन का स्वरूप बदलकर भक्ति जागरण तक सीमित हो गया। समिति के पूर्व कार्यकर्ता श्रवण कुमार का दावा है कि पिछले दो वर्षों से जागरण के लिए अनुमति नहीं मिल पाई है।

नियमों के तहत अनुमति देने की मांग

आयोजकों की मांग है कि कानून-व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करते हुए डीजे पर प्रतिबंध बरकरार रखा जाए। साथ ही पूजा, भजन, आवश्यक घोषणाओं और भक्ति जागरण के लिए निर्धारित नियमों के तहत सामान्य साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए।

SDO ने आवेदन मिलने पर अनुमति पर कही बात

मामले को लेकर बिहारशरीफ सदर एसडीओ कृषलय श्रीवास्तव ने कहा कि यदि आयोजकों की ओर से जागरण आयोजित करने के लिए आवेदन दिया जाता है तो उस पर नियमानुसार स्वीकृति दी जाएगी। अब आयोजकों की नजर प्रशासनिक अनुमति पर है। सोहसराय में करीब नौ दशक पुरानी गणेश पूजा परंपरा के बीच इस वर्ष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम किस स्वरूप में आयोजित होते हैं, यह प्रशासन की अनुमति के बाद स्पष्ट होगा।

 

रिपोर्ट – वीरेंद्र कुमार

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