Home विदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वीजा पर जारी किए गए एक नए आदेश से कंपनियों की माली हालत खस्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वीजा पर जारी किए गए एक नए आदेश से कंपनियों की माली हालत खस्ता

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एक प्रतिष्ठित थिंक टैंक का अनुमान है कि इससे अमेरिकी कंपनियों की कमर टूट सकती है। इन्हें 100 अरब डॉलर (करीब सात लाख 36 हजार करोड़ रुपये) तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।ट्रंप ने गत जून में एक कार्यकारी आदेश जारी कर एच-1बी और एल-1 समेत कई वीजा पर इस साल के आखिर तक रोक लगा दी थी। इससे भारतीय समेत अन्य विदेशी कामगारों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लग गई है।

थिंक टैंक ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट ने इस हफ्ते एक रिपोर्ट में बताया कि ट्रंप ने गत 22 जून को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश के तहत नया एच-1बी और एल-1 वीजा जारी करने पर 31 दिसंबर तक रोक लगा दी गई है। इस कदम का कंपनियों पर दीर्घकालीन नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस आदेश के चलते करीब दो लाख विदेशी कामगारों और उनके आश्रितों के अमेरिका आने पर रोक लगने का अनुमान है।

कंपनियां इन वीजा के आधार पर विदेशी पेशेवरों को नौकरी देती हैं या उनका तबादला करती हैं। एच-1बी वीजा भारतीय आइटी पेशेवरों में खासा लोकप्रिय है। इस वीजा के जरिये अमेरिकी कंपनियां उच्च कुशल विदेशी कामगारों को रोजगार देती हैं। हर साल विभिन्न श्रेणियों में 85 हजार वीजा जारी किए जाते हैं। जबकि एल-1 वीजा कंपनियों के लिए आंतरिक तबादले के लिए है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन द्वरा इस तरह आव्रजन पर लगाम लगाने के उपायों से अमेरिकी फर्मों पर स्थायी रुप से नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद आर्थिक सुधार की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी।

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