रिपोर्ट: सत्यम दुबे
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस की नीति की जमकर तारीफ हो रही है। योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए सूबे में बेहतर कानून व्यवस्था बनाने में सफल हुई है। पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण की अगुवाई में 151 बुद्धिजीवियों ने खुला पत्र लिखकर तारीफ की है।
आपको बता दें कि बुध्दिजीवियों द्वारा लिखे इस पत्र में बताया गया कि कुछ पूर्व अधिकारी और सामाजिक लोग छुपे हुए राजनीतिक एजेंडे के तहत योगी आदित्यनाथ सरकार को बदनाम करने के लिए कार्य कर रहे हैं। आगे लिखा गया है कि उनका एकमात्र एजेंडा है कि सरकार को बदनाम किया जा सके।
योगी सरकार के पक्ष में लिखे गए 151 बुद्धिजीवी लोगों में पूर्व न्यायमूर्ति के अलावा पूर्व IAS, पूर्व IFS और पूर्व IPS अधिकारी भी शामिल हैं। इस पत्र में सरकार की कानून व्यवस्था की तारीफ की गई और साथ ही उत्तर प्रदेश में अपराध के कम होते आंकड़ों को आधार बनाकर योगी सरकार पर हमला कर रहे कुछ समूह के लोगों पर सवाल दागे गए।
इस पत्र में कुछ आंकड़ा भी दिया गया है। पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण ने लिखा कि पिछली सरकार के शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश में 699 हत्या की घटना हुई तो वहीं 263 रेप हुए। साथ ही साथ 249 लोगों के साथ लूट की वारदात को अंजाम दिया गया।
इसके साथ ही योगी सरकार के द्वारा पुलिस एनकाउंटर में मुस्लिम, दलित और ओबीसी वर्ग के लोगों को ही मारने के आरोपों पर जवाब देते हुए लिखा गया कि 20 मार्च 2017 से 11 जुलाई 2021 तक सूबे में कुल 8,367 एनकाउंटर किए गए, इनमें 18,025 अपराधियों को गोली लगी। जबकि 3,246 अपराधी गिरफ्तार किए गए और 140 अपराधियों की जान गई। जिन 140 अपराधियों को मुठभेड़ में मारा गया उनमें से 115 अपराधियों पर इनाम घोषित था।
वहीं पत्र में आगे लिखा गया कि इनमें से 21 अपराधियों पर 50 हजार रुपये और 9 पर 1.5 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। पत्र में आगे बताया गया कि जो 140 अपराधी मारे गए हैं, उनमें से अल्पसंख्यक समुदाय के महज 51 लोग शामिल थे। बड़ी बात यह है कि 13 पुलिस वाले भी अपराधियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए तो 1,140 पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे।
इसके साथ ही इस पत्र में सिद्धिकी कप्पन की गिरफ्तारी, उपद्रवियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने और कोरोना की दूसरी लहर के दौरान योगी सरकार के कामकाज का भी समर्थन किया गया। आपको बता दें कि योगेंद्र नारायण के साथ-साथ जिन लोगों ने खुला पत्र लिखा है, उन लोगों ने यह उम्मीद जताई है कि पूर्व नौकरशाह और समाज से जुड़े जिम्मेदार वर्ग के लोग इस तरह बेवजह आरोप लगाने से बाज आएंगे।