पन्ना: जिले के इटवा खास गांव में भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़ी एक अनमोल धरोहर आज भी सुरक्षित है। यहां पटेरिया परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से करीब 142 वर्ष पुरानी श्रीमद्भागवत पुराण और हस्तलिखित गीता को संभालकर रखे हुए है। यह दुर्लभ ग्रंथ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय हस्तलिखित विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी माना जा रहा है।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत देश की प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग की पहल पर प्रदेशभर में दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज की जा रही है। पन्ना जिले में कलेक्टर ऊषा परमार द्वारा गठित समिति के माध्यम से इस दिशा में कार्य किया जा रहा है।
पन्ना तहसील के ग्राम इटवा खास में पांडुलिपियों की खोज के दौरान टीम अजीत पटेरिया के घर पहुंची। समिति के सदस्यों आबकारी उपनिरीक्षक मुकेश पांडेय और धर्मार्थ शाखा प्रभारी मनोज पांडेय ने इस प्राचीन ग्रंथ का निरीक्षण किया। परिवार के सदस्य अरुण पटेरिया ने बताया कि उनके स्वर्गीय दादा ठाकुर प्रसाद पटेरिया श्रीमद्भागवत पुराण के विद्वान थे। उन्हीं के समय से यह प्राचीन ग्रंथ परिवार में सुरक्षित रखा गया है।

पुस्तक में दर्ज जानकारी के अनुसार यह श्रीमद्भागवत पुराण संवत 1942 यानी वर्ष 1884 का बताया जाता है। लगभग 142 वर्ष पुराने इस ग्रंथ को ठाकुर प्रसाद पटेरिया द्वारा हस्तलिखित गीता के साथ आज भी परिवार द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। यह पांडुलिपि उस समय की लेखन शैली और धार्मिक ज्ञान परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
पटेरिया परिवार के प्रपौत्र अजीत पटेरिया इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। आसपास के क्षेत्रों में आयोजित होने वाली श्रीमद्भागवत कथाओं के दौरान इस प्राचीन ग्रंथ को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए भी रखा जाता है। कई अवसरों पर इसे पन्ना के श्री जुगलकिशोर मंदिर में भी प्रदर्शित किया जा चुका है। परिवार का कहना है कि इस ग्रंथ का अध्ययन करने वाले लोग अब बहुत कम रह गए हैं। वर्तमान में पंडित बृज बिहारी मिश्रा ही इसका पाठ करने वाले प्रमुख विद्वानों में शामिल हैं।
‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत इस दुर्लभ भागवत ग्रंथ और हस्तलिखित गीता को स्कैन कर ज्ञान भारतम् मोबाइल एप पर अपलोड किया गया है। इससे आने वाली पीढ़ियों और शोधकर्ताओं को इस प्राचीन ज्ञान धरोहर तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इस कार्य के दौरान सचिन मिश्रा और आदित्य नायक ने भी सहयोग प्रदान किया।
इटवा खास का यह प्राचीन ग्रंथ परिवार की श्रद्धा और संरक्षण भावना का उदाहरण है। 142 वर्षों से सुरक्षित यह हस्तलिखित धरोहर भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपरा और प्राचीन ज्ञान प्रणाली को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।