रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य का नाम आते ही लोगो में विद्वता आनी शुरु हो जाती है। इतना ही नहीं चाणक्य ने अपनी नीति और विद्वाता से चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठा दिया था। इस विद्वान ने राजनीति,अर्थनीति,कृषि,समाजनीति आदि ग्रंथो की रचना की थी। जिसके बाद दुनिया ने इन विषयों को पहली बार देखा है। आज हम आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के उस नीति की बात करेंगे। जिसमें उन्होने बताया है कि पांच गुणों में केवल एक गुण ही इंसान को जानवरों से अलग करता है।
आहारनिद्राभयमैथुनं च सामान्यमेतत्पशुभिर्नराणाम्।
धर्मो हि तेषामधिको विशेषो धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः।।
इस श्लोक के माध्यम से उन्होने कहा कि भोजन करना, नींद लेना, भयभीत होना और संतान उत्पत्ति करना, ये चार बातें मनुष्य और पशु में एक जैसी होती हैं। उन्होने आगे कहा कि मनुष्य में और पशुओं में केवल धर्म का भेद है। यह एक मात्र ऐसी विशेष चीज है जो मनुष्य को पशु से अलग बनाती है। जिस मनुष्य में धर्म नहीं है वह पशु के समान होता है।