Home उत्तर प्रदेश वाराणसी : शरद पूर्णिमा पर कृष्णमय हुई काशी,झूम के नाचे भक्त

वाराणसी : शरद पूर्णिमा पर कृष्णमय हुई काशी,झूम के नाचे भक्त

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वाराणसी : करीब सात बर्षो बाद शुक्रवार को बने शरद पूर्णिमा के अनुपम संयोग पर पूरी शिवनगरी काशी कृष्णमय हो गई। कृष्ण भजन पर महिलाओं ने रासलीला पर गोपिका बनकर नृत्य किया तो घर से लेकर मठों तक पौराणिक मान्यता के मुताबिक चंद्रमा की रोशनी में खीर को रखा गया।

इस साल शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिदि योग भी बना। शुक्रवार की शाम करीब पांच बजकर 46 मिनट पर पूर्णिमा तिथि जैसे ही लगी, पूरी काशी कृष्ण के भजनों पर झूमने लगी।

31 अक्टूबर शनिवार की रात्रि आठ बजकर 19 मिनट तक पूर्णिमा रहेगी। हालांकि उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि 31 अक्टूबर को रहेगी। शनिवार को स्नान, दान, व्रत और धार्मिक पूजा संपन्न होगी।

उत्तर भारत में इस दिन की खास मान्यता खीर से जुड़ी हुई है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर उसे खाने से शरीर निरोगी होता है। काशी में इस बार शरद पूर्णिमा पर तुलसी परिक्रमा भी की जा रही है।

जो 24 घंटे अनवरत चल रही है। महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी महाराज ने बताया कि शरद पूर्णिमा वृंदावन और कृष्ण से जुड़ी है। तुलसी जी का एक नाम वृंदा भी है। इसलिए इस बार पूरे शरद पूर्णिमा के नक्षत्र तक लगातार भक्त तुलसी की परिक्रमा कर रहे हैं।

वीओ- शरद पूर्णिमा के खास नक्षत्र की बात करें तो पांच शुभ योगों में चंद्रमा का योग 16 कलाओं से युक्त रहा। पूर्णिमा पर तिथि, वार और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थ सिद्धि योग बना। इसके साथ ही लक्ष्मी, शंख, महाभाग्य और शश नाम के चार राजयोग भी बने। इन अदभुत योगों पर महिलाओं और लड़कियों पर गोपी गीत पर नृत्य करते हुए कृष्ण और तुलसी की परिक्रमा की।

 

पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा पर ही देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। शुक्रवार को पूर्णिमा होने से इसलिए लक्ष्मी प्राप्ति का योग और प्रबल हो गया। सात साल बाद बना ये संयोग अब 13 साल बाद 2033 में सात अक्टूबर को ही बनेगा। इसलिए भक्त भगवान की अराधना में लीन रहे। घर से लेकर मंदिरों तक में चंद्रमा के औषधीय गुणों को प्राप्त करने के लिए खीर रखी गई। जिसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया।

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