Home उत्तराखंड मां भगवती बाल सुंदरी के ऐतिहासिक चैती मेले में लगने वाला नखासा मेले को लेकर चर्चाएं शुरू

मां भगवती बाल सुंदरी के ऐतिहासिक चैती मेले में लगने वाला नखासा मेले को लेकर चर्चाएं शुरू

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काशीपुर: काशीपुर में मां भगवती बाल सुंदरी के ऐतिहासिक चैती मेले में लगने वाला नखासा मेले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मेले का आयोजन भले ही कुछ महीने बाद हो, लेकिन अनलॉक फाइव के बाद मेले का आयोजन तय माना जा रहा है। ऐसे में मेलार्थियों के साथ आयोजक और पूजा-पाठ करने वाले आशान्वित हैं।

चैती मेले में लगने वाले नखासा मेले को लेकर घोड़ों के शौकीन उत्साहित हैं। इस मेले की खास बात यह है कि यहां देश की सबसे अच्छी प्रजाति के घोड़े मिला करते हैं। एक समय तो यहां के घोड़े इतने प्रसिद्ध थे कि देशभर के दुर्दांत अपराधी भी इनके कायल थे। डाकू यहां से घोड़े खरीद कर ले जाया करते थे।

सुल्ताना डाकू का यहां से खास लगाव था। ऐसा इसलिए भी था क्योंकि मां भगवती बाल सुंदरी उसकी कुल देवी थीं और वह हर साल यहां प्रसाद चढ़ाने के लिए आया करता था।

मेले से डाकू मान सिंह के अलावा फूलन देवी भी घोड़े खरीद कर ले जाती थीं। बताया जाता है कि चैती मेले में नखासा मेला करीब चार सौ साल पहले रामपुर निवासी घोड़ों के बड़े व्यापारी हुसैन बख्श ने शुरू किया था। नगर के चैती मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री बताते हैं कि मेले के साथ-साथ काशीपुर का चैती नखासा मेला भी भारत में प्रसिद्ध है।

एक समय दूर-दूर से यहां लोग मां के दर्शन करने और घोड़ा खरीदने के लिए आते थे। सुल्ताना डाकू का भी यहां काफी आना-जाना रहा है। वह मां के दर्शन करने और घोड़ा खरीदने के लिए यहां आया करता था। विकास बताते हैं कि नखासा मेला लगभग 500 से 700 साल पुराना है। मां भगवती की कृपा से इस बार भी मेला लगेगा और भक्त मां के दर्शन करने के लिए यहां पहुंचेंगे।

एक समय अफगानिस्तान के व्यापारी लाते थे घोड़े

जानकार बताते हैं कि एक समय यहां अफगानिस्तान, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश के व्यापारी घोड़े लेकर आते और खरीद कर भी ले जाते थे। डाकू मेले में घोड़े खरीदने सामान्य खरीदार के वेश में आते थे और किसी को भी परेशान नहीं करते थे। बीते सालों में भी नखासा मेले में पंजाब, गुजरात, यूपी, हरियाणा के लोग घोड़े खरीदने के लिए आते रहे हैं।

पांच-पांच लाख तक के घोड़े मिलते हैं यहां

काशीपुर का चैती नखासा मेला यूं ही प्रसिद्ध नहीं है यहां पांच लाख रुपये कीमत तक के घोड़े बेचने के लिए लाए जा चुके हैं। यहां से ऐसे-ऐसे घोड़े बिक चुके हैं जो 40 किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकते हैं। पांच फीट से ज्यादा ऊचाई के घोड़े यहां बेचे जा चुके हैं। आमतौर पर यहां के मेले में 50 से 60 हजार रुपए तक कीमत के घोड़े बेचे जाते हैं।

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