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Uttarakhand: चुनाव से ठीक पहले नेताओं का दल-बदलने का सिलसिला शुरु, जानें BJP को फायदा या नुकसान

साल 2012 में जब कांग्रेस सत्ता में आई। कांग्रेस ने अपने टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा  सीएम बनाया। उनके लिए सीट छोड़ी किरण मंडल ने, जो सितारगंज से भाजपा के विधायक थे। दलबदल का सबसे बड़ा उदाहरण राज्य की तीसरी विधानसभा रही।

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

देहरादून: उत्तराखंड में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे, जिसकी तैयारियों में सभी राजनीतिक पार्टियां जुट गई हैं। इसके साथ ही आगामीं विधानसभा चुनाव को देखते हुए नेताओं का दलबदल भी शुरु हो गया है। एक निर्दलीय विधायक अभी हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए थे, वहीं एक कांग्रेस विधायक ने भी BJP का दामन थाम लिया है।

साल 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्ता में आने पर पौड़ी गढ़वाल से सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को सीएम बनाया गया। विधायक बनने के लिए खंडूड़ी को उप चुनाव लड़ना था। खंडूड़ी के लिए कांग्रेस विधायक टीपीएस रावत ने अपनी सीट छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। फिर रावत, खंडूड़ी की पौड़ी गढ़वाल सीट से सांसद बने।

इसी तरीके से साल 2012 में जब कांग्रेस सत्ता में आई। कांग्रेस ने अपने टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा  सीएम बनाया। उनके लिए सीट छोड़ी किरण मंडल ने, जो सितारगंज से भाजपा के विधायक थे। दलबदल का सबसे बड़ा उदाहरण राज्य की तीसरी विधानसभा रही। उस समय कांग्रेस सत्ता में थी, लेकिन 11 विधायकों ने सत्ता छोड़ भाजपा में जाने का विकल्प चुना। आपको बता दें कि इसका कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत से मतभेद रहे, लेकिन जितनी बड़ी संख्या में तब विधायक कांग्रेस से भाजपा में गए, वैसा राज्य के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।

इस वक्त भी जब अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, तो पाला बदलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। विधानसभा चुनाव का अभी बिगुल भी नहीं बजा है, कि नेताओं का दलबदल का सिलसिला शुरु हो गया है।

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