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कानपुर कांड: गैस ऑपरेटेड सेमी ऑटोमेटिक रायफल से विकास ने किया था हमला

By: RNI Hindi Desk 
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कानपुर कांड: गैस ऑपरेटेड सेमी ऑटोमेटिक रायफल से विकास ने किया था हमला

बिकरू कांड में विकास दुबे ने गैस ऑपरेटेड ऑटोमेटिक सेल्फ लोडिंग राइफल का इस्तेमाल किया था। राइफलों में लगे गैस चैम्बर ऑटोमेटिक लोडिंग में मदद करते हैं। जालंधर के पास इस ग्रामीण इलाके में इसी तरह से राइफलों को मॉडीफाई किया जाता है। इन दोनों राइफलों की तलाश पुलिस और एसटीएफ को है।अभी तक दोनों में से किसी राइफल का पता नहीं चल सका है।

दोनों राइफलें एक एजेंसी द्वारा प्रयोग में लाई गई थी। जब यह राइफल एजेंसी के पास थी, तब यह सेमीऑटोमेटिक थी। एजेंसी ने इसे मॉडीफाई कराकर सिंगल शॉट राइफल करा लिया था। उसके बाद यह राइफलें विकास दुबे तक पहुंचीं। उसने इन राइफलों को दोबारा पंजाब से सेल्फ लोड सेमीऑटोमेटिक राइफल में कनवर्ट करा लिया था। एसटीएफ को इस बात की जानकारी मिल चुकी है कि यह राइफल जालंधर के पास एक ग्रामीण इलाके में मॉडिफाई कराई गई थीं।

गैस चैम्बर से हुई मॉडीफाई 
ग्रामीण इलाके में लगभग यही काम होता है। वहां पर बड़े पैमाने पर राइफलों को मॉडीफाई करने का काम किया जाता है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, सिंगल शॉट को सेल्फ लोड में तबदील करने के लिए वहां के लोग उसमें गैस चैम्बर लगा देते हैं, जिससे वह गोलियों की सेल्फ लोडिंग शुरू कर देती है। 

ट्रिगर दबाते पूरी मैग्जीन खाली 
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, सेल्फ लोड राइफल में गोलियों की संख्या भी बढ़ा दी जाती है। कुछ राइफलों की क्षमता 46 गोली तक पहुंचा दी जाती है। इसमें एक बार ट्रिगर दबाने के बाद अगर उसे छोड़ा न जाए तो वह पूरी मैग्जीन खाली करने के बाद ही शांत होती है।

तलाश जारी 
बिकरू कांड की जांच में लगी पुलिस और एसटीएफ को विकास दुबे की इस तरह की दो राइफलों की तलाश है। उसके लिए उन्होंने गांव के कुएं और नदी तक तलाश की है। फिलहाल उन्हें दोनों राइफलें बरामद करने में सफलता हाथ नहीं लग सकी है।

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