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यूपी के गौ आश्रय स्थलों में बनेंगे तालाब, आत्मनिर्भर बनाने के लिए पाली जाएंगी मछलियां

By: RNI Hindi Desk 
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यूपी के गौ आश्रय स्थलों में बनेंगे तालाब, आत्मनिर्भर बनाने के लिए पाली जाएंगी मछलियां

प्रदेश भर के गौ आश्रय स्थल जल्द ही सरकार के भरोसे नहीं बल्कि स्वावलम्बी बनकर अपने खर्चे खुद उठा सकेंगे। अब तक इन आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इनमें जीवामृत, गोमूत्र से अर्क और फिनाइल व गोबर के कम्पोस्ट आदि तैयार कर इनके खुद के खर्चे निकालने की कवायद शुरू की गई थी। अब इन्हें पूरी तरह से आत्म निर्भर बनाने के लिए एक खास रोजगार से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

गौशालाओं में होगा मछली पालन
जी हां, प्रदेश के गौ आश्रय स्थलों की अतिरिक्त भूमि पर तालाब खोदे जाएंगे और फिर उसमें मत्स्य पालन किया जाएगा। मत्स्य विभाग इसमें सहयोग करेगा। वह तालाबों में छोटी मछलियां डालने से लेकर उसे बेचने लायक बनने तक देखभाल भी करेगा। बाद में इन तालाबों की मछलियों को बेचकर आश्रय स्थल अपनी आय बढ़ाएंगे। 

जानकार बताते हैं कि प्रदेश में करीब 5093 गौ आश्रय स्थल हैं, जिनमें आधे से अधिक स्थलों के पास चार से पांच एकड़ या उससे कहीं अधिक भूमि है। हालांकि ज्यादातर आश्रय स्थल ऊसर-बंजर भूमि पर बने हैं, जिससे उनकी अतिरिक्त भूमि पर कोई खेती-किसानी के कार्य संभव नहीं हो पा रही है। इन अतिरिक्त भूमि पर अब मनरेगा के माध्यम से तालाब खोदे जाएंगे। लखनऊ में तो यह कार्य प्रारम्भ भी हो चुका है। 

आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की पहल

इन तालाबों में पली मछलियों को बेचकर जो आय प्राप्त होगी, वह आश्रय स्थल को स्वावलम्बी बनाएगी। गौ आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की पहल पर आश्रय स्थल पहले से ही दूध के साथ-साथ कम्पोस्ट खाद, नाडेप,जीवामृत, गोमूत्र अर्क एवं फिनाइल और वर्मी कम्पोस्ट आदि का कारोबार शुरू कर चुकी है लेकिन इन सबसे अब तक आश्रय स्थलों को अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं हो सका है। सरकार को उम्मीद है कि मत्स्य पालन गौ आश्रय स्थलों के लिए गेम चेंजर साबित होगा।

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