सीहोर जिले के भेरूंदा क्षेत्र से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम वासुदेव का प्रसिद्ध रामानंद धाम गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति से सराबोर नजर आया। वर्षों पुराने इस आश्रम में धार्मिक परंपराएं लगातार निभाई जा रही हैं। यहां समय-समय पर यज्ञ, रामायण पाठ और अन्य आध्यात्मिक आयोजन होते रहते हैं, जिनमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं।
हिंदू धर्म में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु और शिष्य के पवित्र संबंध को समर्पित माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपने गुरुओं के आश्रम पहुंचकर पूजा-अर्चना, आरती और वंदन करते हैं। सीहोर जिले के रामानंद धाम वासुदेव में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे उत्साह और धार्मिक वातावरण के साथ मनाया गया।
गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह से ही रामानंद धाम में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। सबसे पहले प्रातःकालीन आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद आश्रम के आचार्य पंडित मनोज तिवारी ने परम पूज्य गुरु रामानंद जी ब्रह्मचारी का गंगाजल से अभिषेक कर विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। पूजा के बाद प्रसाद वितरण और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की।

रामानंद धाम की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ट्रस्ट की ओर से आश्रम की गतिविधियों, आय-व्यय, आगामी निर्माण कार्यों और धार्मिक योजनाओं की जानकारी श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत की गई। आश्रम प्रबंधन द्वारा गुरु महाराज की शिक्षाओं और परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सीहोर जिले के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे दादाजी धूनीवाले छीपानेर, गुलरपुर गुरु आश्रम और रामगढ़ आश्रम सहित कई स्थानों पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना कर सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक मार्गदर्शन का आशीर्वाद प्राप्त किया।