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गोरखपुर एम्स में अपेंडिक्स सर्जरी की नई तकनीक का सफल प्रयोग, 60 मरीजों पर हुआ अध्ययन

गोरखपुर एम्स में डॉक्टरों ने अपेंडिक्स सर्जरी में हीमोलॉक क्लिप्स के इस्तेमाल की नई तकनीक का अध्ययन किया। 120 मरीजों को दो समूहों में बांटकर किए गए अध्ययन में 60 मरीजों पर इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। एम्स के अनुसार, इससे सर्जरी का समय और इलाज की लागत कम होने की संभावना सामने आई है।

By: Nivedita 
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गोरखपुर एम्स में अपेंडिक्स सर्जरी की नई तकनीक का सफल प्रयोग, 60 मरीजों पर हुआ अध्ययन

गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने अपेंडिक्स की सर्जरी को लेकर एक नई तकनीक का प्रयोग किया है। इस प्रक्रिया में सामान्य तौर पर रक्तस्राव नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली हीमोलॉक क्लिप्स का उपयोग अपेंडिक्स ऑपरेशन में किया गया। संस्थान के अनुसार, इस तकनीक का अध्ययन 60 मरीजों पर किया गया और इसके परिणामों में कम समय में सर्जरी तथा लागत में कमी जैसी बातें सामने आई हैं।

अपेंडिक्स ऑपरेशन में हीमोलॉक क्लिप्स का इस्तेमाल

एम्स गोरखपुर में वरिष्ठ सर्जन डॉ. मुकुल सिंह के मार्गदर्शन में एमएस छात्र की थीसिस के तहत इस तकनीक पर अध्ययन शुरू किया गया। हीमोलॉक क्लिप्स का इस्तेमाल आमतौर पर रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन इस रिसर्च में इसे अपेंडिक्स की सर्जरी के दौरान इस्तेमाल किया गया। तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए कुल 120 मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। इनमें 60 मरीजों की सर्जरी हीमोलॉक क्लिप्स के माध्यम से की गई, जबकि बाकी 60 मरीजों का उपचार पारंपरिक तकनीक से किया गया।

अध्ययन में सामने आए ये परिणाम

एम्स प्रशासन के अनुसार, हीमोलॉक क्लिप्स वाले समूह में सर्जरी के बाद मरीजों की स्थिति का अध्ययन किया गया। संस्थान का दावा है कि इस समूह में डिस्चार्ज से जुड़ी प्रक्रिया, संक्रमण या अन्य पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं के मामले सामने नहीं आए। अध्ययन में ऑपरेशन के समय, मरीज की रिकवरी और उपचार से जुड़ी लागत जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया।

 

सर्जरी का समय और खर्च कम होने का दावा

एम्स गोरखपुर की निदेशक डॉ. विभा दत्ता के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से अपेंडिक्स की सर्जरी में लगने वाला समय कम हुआ है। साथ ही इलाज की लागत में भी कमी आने की बात कही गई है। संस्थान के मुताबिक, प्रक्रिया के बाद मरीजों को होने वाली परेशानी और संभावित जटिलताओं को कम करने की दिशा में भी इसके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं।

रिसर्च को लेकर पेटेंट की जानकारी

एम्स प्रशासन के मुताबिक, इस तकनीक से संबंधित रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुका है। संस्थान की ओर से कनाडा से पेटेंट या कॉपीराइट मिलने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, इस तरह के अधिकारों के तहत तकनीक के इस्तेमाल की शर्तें संबंधित पेटेंट की वास्तविक स्थिति और नियमों के आधार पर तय होंगी।

आगे के शोध की संभावना

गोरखपुर एम्स में किया गया यह अध्ययन अपेंडिक्स सर्जरी में हीमोलॉक क्लिप्स के संभावित उपयोग को लेकर एक नई दिशा प्रस्तुत करता है। संस्थान का कहना है कि इस तकनीक से कम खर्च में सुरक्षित और प्रभावी सर्जरी की संभावनाओं पर आगे भी शोध किया जा सकता है।

 

रिपोर्ट – अंकित श्रीवास्तव 

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