जिले में जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से दौड़ रही डग्गामार बसें जिसके चलते सरकार को लगाया जा रहा है लाखों का चूना जिम्मेदार अधिकारी जानते हुए भी बन रहे अनजान आखिर इन पर कार्यवाही कब
पूरा मामला यूपी के सीतापुर जनपद का है जहां पर जिले के अधिकारियों की मिलीभगत से लखनऊ से सीतापुर वाया लखीमपुर व सीतापुर से दिल्ली हरियाणा ,पानीपत सहित तमाम जगहों के लिए प्राइवेट डग्गामार बसें राष्ट्रीय राजमार्ग पर दौड़ रही है वही जिम्मेदार अधिकारी जानते हुए भी अंजान बने हैं
मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर केवल रोडवेज बसों के अलावा कोई भी प्राइवेट बस ना चलाए जाने की बात कही जा रही है परंतु जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से प्राइवेट बसों का संचालन राष्ट्रीय राजमार्ग पर धड़ल्ले से होता है इतना ही नहीं आपको बता दें नियम तो यह भी है कि रोडवेज बस स्टैंड से करीब 1 किलोमीटर के दायरे में कोई भी प्राइवेट बस न खड़ी हो सकती है ना ही सवारी बैठा सकती है परंतु सीतापुर रोडवेज बस स्टैंड से महज 50 मीटर की दूरी पर प्राइवेट बसें खड़ी होती हैं जिसकी तस्वीरे साफ हकीकत बयां कर रही है
लखनऊ से चलकर सीतापुर होते हुए सीधे लखीमपुर जाती हैं यह डग्गामार बसें सूत्रों की माने तो सीतापुर बस स्टैंड पहुंचने से पहले उनके आदमी लगे हैं जो अपना काम करते है जिसके चलते अधिकारी जानते हुए भी अनजान बने रहते है ऐसे में परिवहन विभाग को लाखों का चूना लगाया जाता है
इस पूरे मामले में ए आर एम सीतापुर से बात की गई तो उन्होंने इन वाहनों के चलते परिवहन विभाग के हो रहे नुकसान को जताया है वह साथ ही पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी ,आरटीओ सहित पुलिस अधीक्षक को अवगत भी कराया गया है परंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है डग्गामार बसें लखनऊ से सीतापुर होते हुए लखीमपुर जाने वाली बसों व जिले से सीधे दिल्ली हरियाणा पानीपत तक बसे जाती हैं वह भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर तो कहीं ना कहीं सरकार के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं व हर महीने लाखों रुपए का चूना भी लगाया जाता है फिर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं
इस पूरे प्रकरण में एआरटीओ अधिकारी उदित नारायण पांडे से बात की गई तो महोदय ने बात को गोल-गोल घुमाते हुए दे दिया अपना वही रटा रटाया जवाब इतनी बसों पर हमने कार्यवाही की इतने बसों को हमने चालान किया इतनी बसों की वसूली की गई और बात खत्म हो गई ,अब सवाल ये उठता है कि आखिर यह सिलसिला कब खत्म होगा क्या चालान करने से समस्या को मिलेगी निजात यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा