श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण के भूमि पूजन व कार्य आरम्भ कार्यक्रम में साक्षी बनने के लिए आमंत्रित किए गए संत- महात्माओं व गणमान्यजनों की सूची इतिहास रचने वाली रही। तैयार सूची में संत- महंत व देश के सभी गणमान्य, नामचीन व विद्वतजनों को शामिल किया गया था। सुरक्षा, गोपनीयता और गरिमा का ध्यान रखकर तैयार की गई सूची में कुल 192 व्यक्तियों का नाम शामिल रहे। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से बुधवार को श्रीरामजन्मभूमि परिसर में किए गए भूमि पूजन कार्यक्रम के आमंत्रित सदस्यों की फाइनल सूची में अयोध्या के अतिरिक्त अन्य स्थानों के 82 संतजन, अयोध्या के 51 संतगण, 26 गणमान्य अतिथि, दो अपर महाधिवक्ता व एक महाधिवक्ता, 12 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी, पांच विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी, दो भारतीय जनता पार्टी, तीन जनप्रतिनिधि व उत्तर प्रदेश सरकार के आठ विशिष्ट व्यक्तियों को शामिल किया गया था।
विस्मृत नहीं किए गए बलिदानी परिवार
खास बात यह है कि देश व विश्व के पटल पर चर्चित इस बहुप्रतिक्षित धार्मिक कार्यक्रम में बलिदानी परिवार को विस्मृत नहीं किया गया। गणमान्य अतिथि की सूची में कोलकाता के शरद कोठारी की बहन पूर्णिमा कोठारी, राजेन्द्र पाण्डेय की धर्मपत्नी, अयोध्या के वासुदेव गुप्त, राजेन्द्र धरकार के परिवार सहित भेलसर निवासी शहीद रामअचल गुप्त के परिवार को भी आमंत्रण भेजा गया।
आपसी एकजुटता व भाईचारे का भी संदेश
यही नहीं पदमश्री मोहम्मद शरीफ और इकबाल अंसारी व सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूकी को शामिल कर आपसी एकजुटता और भाईचारे का भी संदेश दिया गया। सूची में केवल अयोध्या ही नहीं वरन प्रदेश के लगभग सभी जिलों सहित अन्य प्रांतों के विद्धान संत व गणमान्य नागरिक शामिल रहे। नेपाल स्थित जनकपुरधाम के जानकी मंदिर के श्रीराम तपेश्वर दास जी महाराज, मुम्बई के चित्रकार सत्यनारायण मौर्य, अयोध्या निवासी राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त लेखक यतीन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के साथ अवध विश्व विद्यालय और नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति भी आमंत्रित किए गए थे।