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यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने हिंसा छोड़ डाले हथियार, पकड़ी शांति की राह

मणिपुर के उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट यानि यूएनएलएफ ने आखिरकार हथियार डाल दिये और उसे शांति की राह पर चलना ही पड़ा। गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में यह अहम और बड़ी जानकारी दी है।

By: Abhinav Tiwari 
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यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने हिंसा छोड़ डाले हथियार, पकड़ी शांति की राह

दिल्लीः मणिपुर के उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट यानि यूएनएलएफ ने आखिरकार हथियार डाल दिये और उसे शांति की राह पर चलना ही पड़ा। गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में यह अहम और बड़ी जानकारी दी है। नॉर्थ ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने शांति का एक नया अध्याय जोड़ा है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने आज एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मणिपुर का सबसे पुराना सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा को छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए राजी हो गया है। बता दें कि मणिपुर में पिछले कई महीनों से अशांति रही है। मणिपुर में महिलाओं को नग्न कर उनका जुलूस निकाले जाने और उनके सामूहिक रेप के मामला सामने आए थे। आगजनी की तो कई घटनाएँ सामने आई थीं। अब गृह मंत्री अमित शाह ने बताया है कि मणिपुर में बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता त्याग कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है।

अमित शाह का ट्वीट

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक्स पर पोस्ट पर क्या लिखा ये थोड़ा सा जानिए ”भारत सरकार और मणिपुर सरकार द्वारा यूएनएलएफ के साथ आज हस्ताक्षरित शांति समझौता छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री जी के सर्वसमावेशी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने और पूर्वोत्तर भारत में युवाओं को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है”। यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट है क्या, ये जानना भी काफी जरूरी है। समरेंद्र सिंह ने इस फ्रंट की स्थापना की थी। 70 एवं 80 के दशक में इसने जमकर भर्तियाँ कीं और अपना एक बड़ा नेटवर्क बनाया। 1990 के दशक में ये मणिपुर की कथित ‘आज़ादी’ की बातें करने लगा और फ्रंट के लोगों ने हथियार उठा लिए। 1990 में ही उसने ‘मणिपुर पीपल्स आर्मी’ भी बनाई थी। इसके अध्यक्ष राजकुमार मेघन उर्फ़ सना यैमा पर भारत के खिलाफ बगावत और युद्ध छेड़ने का आरोप लगा था, लेकिन ये दावा किया था कि वो भारत के खिलाफ नहीं है बल्कि  मणिपुर में सेना की उपस्थिति के खिलाफ है। फिलहाल मणिपुर का सबसे पुराना सशस्त्र यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट हिंसा को त्यागने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। जो आने वाले इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

 

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