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चाचा vs भतीजा : चाचा पशुपति के बगावती सुर से चिराग की बढ़ी बेचैनी, विधायकों ने चुना अपना नेता…

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : पीएम मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल सुगबुगाहट के साथ ही, बिहार की प्रमुख पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी में बगावती सुर एक बार फिर छिड़ गये है। लेकिन इस बार यह सुर खुद दिवंगत एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस ने छेड़ा है। जिनका समर्थन एलजेपी के ही नवादा से चंदन कुमार, समस्तीपुर से प्रिंस पासवान, खगड़िया से महबूब अली कैसर और वैशाली से वीणा देवी दे रही है। जिन्होंने आपसी सहमति से पारस को अपना नेता चुना है।

हालांकि इन सब बातों को लेकर चिराग की बेचैनी बढ़ गई है और उन्होंने चाचा-भतीजे के इस खाई को पाटने के लिए पशुपति पारस के घर गये। लेकिन वहां उन्हें इंट्री नहीं मिली। तकरीबन 20 मिनट के बाद वो अंदर जा सकें। खबरों की मानें तो, चिराग अपने चाचा पशुपति पारस से नहीं मिल सकें है। क्योंकि जिस वक्त चिराग अंदर गये थे, उस समय पारस अपने आवास पर नहीं थे।

बता दें कि लोकसभा चुनाव में 6 सीटें जीता था। इसके बाद दिवंगत नेता रामविलास पासवान को पीएम मोदी के कैबिनेट में जगह मिली। वहीं एक बार फिर जब केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होने वाला है तो चिराग लगातार पीएम मोदी से संपर्क करने की कोशिश में थे, लेकिन उससे पहले ही नवादा से चंदन कुमार, समस्तीपुर से प्रिंस पासवान, खगड़िया से महबूब अली कैसर और वैशाली से वीणा देवी ने पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस को अपना नेता चुना है ।

खबरों की मानें तो पिछले कई समयों से पार्टी के नेता चिराग के नेतृत्व से खासे नाराज थे। इसे लेकर पहले भी पार्टी से बगावती सुर उठ चुंके थे। लेकिन चिराग द्वारा समय पर डैमेज कंट्रोल न करने का कारण अब वे पार्टी में अलग-थलग नजर आ रहे है।

बता दें बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद से चिराग पासवान खुद पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने का फैसला लेने के बाद एलजेपी की बुरी हार हुई। उसके बाद हाशिए पर चल रही एलजेपी की राजनीति और बिहार की राजनीति में ये बड़ा भूचाल ला सकती है।

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