नई दिल्ली : कोरोना महामारी के बीच देश में लगातार कोरोना वैक्सीनेशन का कार्यक्रम चल रहा है, जिसे सफल बनाने की कोशिश की जा रही है। एक तरफ जहां इस महामारी को लेकर 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भी ये वैक्सीन लगना शुरू हो गया है, वहीं कई क्षेत्रों में अभी भी इसकी शुरूआत नहीं हुई है। जिसका कारण कहीं न कहीं वैक्सीन उत्पादन की कमी है।

आपको बता दें कि ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन से ब्लड क्लॉट के साइड इफेक्ट का असर भारत की कोविशील्ड वैक्सीन पर भी पड़ा है, जिससे लोग काफी घबराए हुए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (mohfw) ने हेल्थ केयर वर्कर्स और वैक्सीन लेने वालों के लिए वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर एडवाइजरी जारी किया है, जिसमें उन्होंने लोगों से वैक्सीनेशन के 20 दिन के भीतर थ्रॉम्बोसिस (ब्लड क्लॉट्स) के लक्षणों को पहचान करने की अपील की है। यदि कोई गंभीर लक्षण नजर आता है तो उसे वैक्सीन सेंटर पर जाकर दर्ज कराएं।

एडवाइजरी में लोगों को दी गई सलाह
वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट पर बनी राष्ट्रीय समिति ने कहा कि भारत में ब्लड क्लॉट के बहुत कम मामले ही कोविशील्ड के वैक्सीनेशन से जुड़े हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत में कोविशील्ड वैक्सीन की प्रति 10 लाख डोज पर डीप वेन थ्रॉम्बोसिस या ब्लड क्लॉट्स के सिर्फ 0.61 फीसद मामले ही देखे गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन के मुकाबले भारत में वैक्सीन से साइड इफेक्ट के मामले बहुत कम देखे जा रहे हैं। इस डेटा का मूल्यांकन करने वाली सरकार द्वारा गठित कमिटी ने ये भी कहा कि पश्चिमी देशों की तुलना में दक्षिण एशियाई लोगों में वैक्सीनेशन के बाद थ्रोम्बोसिस या खून के थक्के बनने की संभावना कम हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, ब्लड क्लॉट के अधिकांश मामले वैक्सीनेशन के पहले सप्ताह के बाद तक देखे गए हैं। ऐसे में वैक्सीन लेने वाले लोगों से 28 दिन के भीतर इसे रिपोर्ट कराने की अपील की गई है। ब्लड क्लॉट के मामलों से जुड़ा डेटा बताता है कि ब्लड क्लॉट की समस्या महिलाओं और पुरुषों में समान रूप से देखी गई हैं। उन्होंने ये भी बताया कि भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवैक्सीन में किसी तरह के ब्लड क्लॉट की समस्या अभी तक भारत में नहीं देखी गई है।

31 मार्च को हुई बैठक के दौरान AEFI समिति को सौंपी रिपोर्ट के अनुसार, वैक्सीनेशन के बाद गंभीर साइड इफेक्ट्स और मौत के कुल 617 मामले सामने आए हैं। 29 मार्च तक देशभर में टीकाकरण के बाद कुल 180 मौतें (29.2 प्रतिशत) दर्ज की गई हैं। हालांकि 236 मामलों (38.3 प्रतिशत) के लिए ही कंप्लीट डॉक्यूमेंटेशन उपलब्ध है।
आपको बता दें कि कोविशील्ड चिम्पैंजी एडेनोवायरस वेक्टर पर आधारित वैक्सीन है। इसमें चिम्पैंजी को संक्रमित करने वाले वायरस को आनुवांशिक तौर पर संशोधित किया गया है ताकि ये इंसानों में ना फैल सके। इस संशोधित वायरस में एक हिस्सा कोरोना वायरस का है जिसे स्पाइक प्रोटीन कहा जाता है।
ये वैक्सीन शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स बनाती है जो स्पाइक प्रोटीन पर काम करता है। ये वैक्सीन एंटीबॉडी और मेमोरी सेल्स बनाती है जिससे के वायरस को पहचानने में मदद मिलती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये वैक्सीन कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी जेनरेट करने का काम करती है।