नई दिल्लीः देश में लोकसभा चुनाव के लिए एक साल का वक्त भी नहीं बचा है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने दांव पेंच चलने शुरू कर दिए हैं। वहीं देश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी भी इस चुनाव के लिए पुख्ता रणनीति बनाने में जुटी है। खबर है कि केंद्र सरकार मौजूदा राष्ट्रीय पेंशन योजना में बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है। जिससे लाखों कर्मचारियों को फायदा होगा। सरकार की योजना कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन का 40प्रतिशत से 45 प्रतिशत न्यूनतम पेंशन देने की है।
एनपीएस की हो सकती है समीक्षा
दरअसल कांग्रेस के द्वारा पुरानी पेंशन स्कीम को चुनावी मुद्दा बनाने के बाद अब केंद्र सरकार भी इस मामले पर एक्सरसाइज करती नजर आ रही है। सरकार 2024 के चुनाव से पहले विपक्ष के इस हथियार की धार को कुंद कर सकती है। संभव है कि सरकार ‘न्यू पेंशन सिस्टम’ की समीक्षा कर सकती है या फिर उसमें कुछ संशोधन कर सकती है। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते अप्रैल माह में पुरानी पेंशन योजना की समीक्षा के लिए वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। केंद्र ने साल 2004 से ‘ओल्ड पेंशन सिस्टम’ को समाप्त कर ‘न्यू पेंशन सिस्टम’ लागू किया था। इसके तहत पेंशन फंड में कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 10 प्रतिशत तो सरकार 14 प्रतिशत का योगदान देती है। ‘न्यू पेंशन सिस्टम’ की राशि को बाजार में निवेश किया जाता है और उसके रिटर्न के आधार पर पेंशन राशि निर्भर करती है। वहीं, ओपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन अंतिम वेतन का 50 फीसदी है।
सरकार पर दो फीसदी पड़ेगा अतिरिक्त भार
इसमें एक बात तो साफ है कि सरकार पुरानी पेंशन स्कीम को वापस नहीं लाएगी। सरकार का मानना है कि ये नया प्लान उन राज्यों की चिंताओं को दूर करेगा, जो पुरानी पेंशन स्कीम पर वापस जा रहे। गैर बीजेपी शासित राज्यों ने राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और पंजाब ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने का ऐलान किया था। हालांकि इसे लागू करने से इन राज्यों की आर्थिक स्थिति पर बोझ बढ़ जाएगा। सूत्रों के मुताबिक संशोधित पेंशन योजना से बजट पर उतना जोर नहीं पड़ेगा। वर्तमान रिटर्न से पता चलता है कि कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन का लगभग 38 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता है, ऐसे में उनको केवल 2 प्रतिशत अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी।
एक तीर से कई निशाने साधेगा केंद्र
दरअसल केंद्रीय वित्त मंत्रालय ऐसा रास्ता अपनाना चाहता है, जिससे सरकार पर पेंशन का भार कम से कम पड़े। संभावना है कि सरकार जो पेंशन योजना विचार कर रही है, उसे महंगाई भत्ते से नहीं जोड़ा जाएगा। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र इस नई योजना को मंजूरी दे सकता है। बहरहाल मौजूदा राष्ट्रीय पेंशन योजना में बदलाव कर केंद्र सरकार एक तीर से कई निशाने साधने का प्लान बना रही है।
सीनियर जर्नलिस्ट प्रताप राव की कलम से