रिपोर्ट: सत्यम दुबे
रायबरेली: गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले अमेठी में BJP का बढ़ता कद कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ाने जैसा है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के सामने स्मृति ईरानी मैदान में थी। इस चुनाव में स्मृति को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन पांच साल बाद स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को उनके गढ़ में हराकर कांग्रेस की जड़ को हिला दिया था। राहुल गांधी को हराने के बाद अमेठी में स्मृति की सक्रियता बढ़ गई।
अमेठी तो अमेठी स्मृति की सक्रियता अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में भी बढ़ गई है। जिसका परिणाम है कि स्मृति को रायबरेली में दिशा का अध्यक्ष बना दिया गया है। जबकि सोनिया गांधी को को-चेयरपर्सन की भूमिका दी गई है।
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद दिशा समिति का गठन होता है। ये समिति हर तीन महीने में केंद्रीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करती है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से अध्यक्ष और सहअध्यक्ष का मनोनयन किए जाने के बाद डीएम के स्तर से दिशा का गठन किया जाता है। दिशा में सभी विधायकों, ब्लॉक प्रमुखों और अन्य संसद सदस्यों को शामिल किया जाता है। साल 2019 में देश में नई सरकार के गठन के बाद लगभग सभी संसदीय क्षेत्रों (जिलों) में दिशा का गठन कर दिया गया, लेकिन रायबरेली में ऐसा नहीं हुआ था।
2019 के केंद्र सरकार के गठन के दो साल बाद उस जरूरी प्रक्रिया को पूरा किया गया है, लेकिन एक बड़े फेरबदल के साथ। रायबरेली में लंबे समय बाद सोनिया गांधी को अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। अब उनकी जगह ये जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को दे दी गई है। वहीं सोनिया गांधी दिशा संगठन का हिस्सा बनी रहेंगी, लेकिन अब वे को-चेयरपर्सन की भूमिका अदा करेंगी।
जिसके बाद सोनिया गांधी के प्रतिनिधि केएल शर्मा का कहा कि अमेठी सांसद स्मृति ईरानी के क्षेत्र में रायबरेली की एक विधानसभा सीट आती है। अब वे केंद्रीय मंत्री हैं, ऐसी स्थिति में नियम है कि जो सांसद बड़ा होगा उसी को दिशा का चेयरपर्सन बनाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री होने के नाते स्मृति को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने उन्हें अमेठी के साथ ही रायबरेली का भी चेयरपर्सन बनाया है।