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कटनी में लीज़ समाप्त होने के बाद भी क्रेशर संचालन का आरोप, सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे को लेकर उठे सवाल

कटनी जिले के ग्राम कनौर में सार्वजनिक निस्तार मार्ग की भूमि पर लीज़ अवधि समाप्त होने के बाद भी क्रेशर संचालन जारी रहने का आरोप लगाया गया है। कलेक्टर और तहसीलदार द्वारा कब्जा हटाने के आदेश जारी किए जाने के बावजूद ग्रामीणों का दावा है कि अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक आदेशों के पालन की मांग की है।

By: Nivedita 
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कटनी में लीज़ समाप्त होने के बाद भी क्रेशर संचालन का आरोप, सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे को लेकर उठे सवाल

कटनी जिले की बरही तहसील के ग्राम कनौर में सार्वजनिक निस्तार मार्ग की भूमि पर कथित कब्जे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लीज़ अवधि समाप्त होने और प्रशासनिक आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित भूमि पर अब भी क्रेशर उद्योग का संचालन किया जा रहा है, जिससे आम लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

10 वर्ष की लीज़ अवधि हो चुकी है समाप्त

जानकारी के अनुसार, ग्राम कनौर के खसरा नंबर 861, जो राजस्व अभिलेखों में “रास्ता कच्चा” (सार्वजनिक निस्तार मार्ग) के रूप में दर्ज है, पर वर्ष 2015 में 10 वर्षों के लिए सब्सिडियरी प्रयोजन की अनुमति दी गई थी। यह अनुमति 28 जुलाई 2025 को समाप्त हो चुकी है।

कलेक्टर और तहसीलदार ने दिए थे कब्जा हटाने के निर्देश

कलेक्टर न्यायालय ने 3 जून 2026 को जारी आदेश में कहा था कि लीज़ समाप्त होने के साथ ही भूमि पर दी गई अनुमति स्वतः समाप्त हो गई है। आदेश में संबंधित भूमि से मशीनरी और अन्य सामग्री हटाकर सार्वजनिक मार्ग को खाली कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद तहसीलदार ने भी सात दिनों के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश जारी किए थे।

ग्रामीणों ने आदेशों के पालन नहीं होने का लगाया आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक आदेशों के बावजूद मौके पर अब भी क्रेशर का संचालन जारी है। उनका आरोप है कि सार्वजनिक रास्ता बाधित होने से किसानों और ग्रामीणों को खेतों तक आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने क्रेशर संचालक तिलकराज ग्रोवर पर आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

 

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ प्रशासनिक आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आदेश जारी हो चुके हैं तो उनका समयबद्ध पालन भी होना चाहिए। साथ ही उन्होंने मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई है।

प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें

जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण से संबंधित एक रिट याचिका हाईकोर्ट में भी विचाराधीन रही है। वहीं, कलेक्टर के आदेश में सार्वजनिक उपयोग की भूमि को खाली कराने की बात कही गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

 

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