अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल पाटिल ने आरोप लगाया कि एसआईटी में शामिल कुछ अधिकारियों पर पहले से भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। ऐसे में उन्हीं अधिकारियों को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी देना जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बजाय लीपापोती करने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस ने दावा किया कि जिन नामों को लेकर पहले सवाल उठाए जा रहे थे, उनमें चंपत राय और अनिल मिश्रा को जांच के दायरे से बाहर रखा गया है। पार्टी ने कहा कि इससे जांच की पारदर्शिता पर और अधिक सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान (सीटिंग) न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। पार्टी का कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सकेगी।

कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर फिलहाल एसआईटी या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आरोपों और तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हालांकि, मामले से जुड़े आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल सभी की नजर जांच प्रक्रिया और उसके अंतिम निष्कर्षों पर बनी हुई है।