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सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका, दिन और फायदे

By: RNI Hindi Desk 
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सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका, दिन और फायदे

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है. यह भी मानते हैं कि इस दिन सूर्य नमस्कार करने से अधिक लाभ मिलता है. सूर्य नमस्कार शरीर को स्‍वस्‍थ और लचीला बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही कई सूक्ष्‍म व्‍यायाम भी करवाए जाते हैं.

इसमें बताया गया कि अगर आपका शरीर स्‍वस्थ है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी बॉडी का शेप क्‍या है. मगर स्‍वस्‍थ बने रहने के लिए जरूरी है कि आप नियमित तौर पर योगाभ्‍यास करें. रविवार के दिन सूर्य नमस्‍कार का योगाभ्‍यास विशेष रहता है. यह योग पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है.

सूर्य नमस्कार कई आसनों को मिलाकर बनाया गया है. हर आसन के बाद शवासन में थोड़ा- थोड़ा विश्राम लें और अंत में अनुलोम विलोम का दस मिनट का अभ्‍यास जरूर करें.

सूर्य नमस्कार की मदद से कई बीमारियों से न सिर्फ बचाव ही किया जा सकता है, बल्कि इन्‍हें दूर भी किया जा सकता है. योग करने से शरीर को एनर्जी  मिलती है और मन शांत रहता है. साथ ही व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि इसमें अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें.

सूर्य नमस्कार 

सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है. सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है. पर सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं.

प्रणाम आसन- इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं. फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं.

हस्ततुन्नासन- इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.

 

हस्तपाद आसन- इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें. अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं.

 

अश्व संचालन आसन इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.

पर्वत आसन- इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.

अष्टांग नमस्कार- इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.

भुजंग आसन- इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.

मार्जारी आसन- मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. वज्रासन में बैठें और कैट वॉक पोज में आएं. इसके बाद लंबी गहरी सांस भरें और लंबी गहरी सांस छोड़ें.

शवासन- मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए. पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें. पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए. हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें. पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें. धीरे धीरे इसे कम करें. जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें.

 

 

 

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