पन्ना। जिले में शिक्षकों ने TET (टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट) परीक्षा के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने आरटीई संशोधन कानून 2017 पर आपत्ति जताते हुए लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग की।
शिक्षकों ने शहर में रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे और उन्होंने TET परीक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षकों ने मांग की कि वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा देने की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। उनका कहना है कि उनकी नियुक्तियां तत्कालीन राज्य सरकार की नीतियों और नियमों के अनुसार हुई थीं, इसलिए बाद में लागू नियमों को उन पर लागू करना उचित नहीं है।
शिक्षकों ने आरटीई अधिनियम में वर्ष 2017 में किए गए संशोधन को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि दो दशकों से अधिक समय से शिक्षण कार्य कर रहे अनुभवी शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्न उठाना न्यायसंगत नहीं है।
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि वर्षों के अनुभव के आधार पर वे लगातार बेहतर परिणाम दे रहे हैं और उनके पढ़ाए हुए छात्र विभिन्न क्षेत्रों में जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। इसके बावजूद TET परीक्षा अनिवार्य करना उनके लिए अनुचित दबाव है।

शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें पात्रता परीक्षा से छूट प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जल्द से जल्द आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई।